निर्भया की तकलीफ ही मेरी ताकत बनी – निर्भया की मां

निर्भया केस में बीते 24 घंटे बेहद उठापटक वाले थे और ऐसे में एक बार फिर सवाल खड़ा हो रहा था कि क्या चारों दोषियों को फांसी होगी या फिर डेथ वारंट चौथी बार फिर स्टे होगा। लेकिन जैसे ही सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की अर्जी को खारिज किया वैसे ही 5:30 बजे होने वाली फांसी का रास्ता भी साफ हो गया । शुक्रवार की सुबह चारों को फांसी होने के बाद निर्भया की मां ने कहा कि मेरा दर्द ही मेरी ताकत बना। इंसाफ तो आज फांसी मिलने के साथ पूरा हो गया और सिर्फ निर्भया को ही इंसाफ नहीं मिला बल्कि इस देश की हर बच्ची को इंसाफ मिला है । हमारा 7 साल पुराना संघर्ष पूरा हो गया है। वहीं दूसरी ओर निर्भया के पिता बद्रीनाथ ने कहा कि निर्भया को लेकर आम मां-बाप बाप की तरह हमारे ढेर सारे सपने थे लेकिन उसके जाने से हमारे सारे सपने बेमौत मर गए।

निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि मैं कहीं भी जाती थी तो लोग मुझसे पूछते थे कि आपको इतना संघर्ष और लड़ने की प्रेरणा कहां से मिलती है । निर्भया की तकलीफ ने ही मुझे ताकत दी इस लड़ाई को लड़ने की। निर्भया की तकलीफ ही मेरी ताकत बनी ।

आशा देवी ने आगे भावुक होते हुए बताया कि वह दृश्य मैं कभी नहीं भूल सकती कि निर्भया के चेहरे से मांस के लोथड़े तक निकाल दिए गए थे। उसके अंदरूनी अंगों तक को निकाल कर फेंक दिया गया था। एक मां कैसे देख सकती है । मां के लिए धन-दौलत कोई मायने नहीं रखती है । बच्चों में ही मां की जान बसती है ।

फांसी की सजा की वकालत करते हुए निर्भया की मां ने कहा कि फांसी देने से ही बलात्कार रुकेंगे। जो लोग कहते हैं कि फांसी देने से बलात्कार नहीं रुकेंगे वह मानवाधिकार की आड़ में अपना बिजनेस चला रहे हैं। ऐसी मानसिकता वाले लोगों की वजह से ही हमारे देश में ना बलात्कार रुक पा रहे हैं और ना बलात्कार पीड़ितों को न्याय मिल पाता है। उनके अपने परिवार के लोगों के साथ ऐसा होगा तब उन्हें समझ आएगा । महिलाएं तो महिलाएं छोटे-छोटे बच्चे तक सुरक्षित नहीं हैं। लड़कियां ही नहीं लड़के भी असुरक्षित हैं।

निर्भया की मां ने अपना दुख साझा करते हुए कहा कि फांसी तो 2013 में ही हो गई थी लेकिन 2020 तक हम इंतजार में ही बैठे रहे । उसी की वजह से ही निर्भया के केस के बाद भी बलात्कार की घटनाएं नहीं रुकीं । कागज पर फांसी सुना देने से किसी के मन में डर नहीं होगा, डर तब होता है जब फांसी दी जाती है और बाकी लोग उसे देखते हैं ।

आशा देवी ने आगे कहा कि अगर चारों दोषियों को 2013 में ही फांसी हो गई होती तो बहुत सारी लड़कियों को बलात्कार से बचाया जा सकता था । आज बच्चियों को जिंदा जलाया जा रहा है । आज उदाहरण के तौर पर समाज में एक सही मैसेज जाएगा कि बच्चियों के साथ जो भी ऐसा करेगा उसको फांसी होगी।

फांसी के बाद निर्भया के पिता इंसाफ पूरा होने से संतोष में तो दिखे लेकिन फिर भी उनके दिल में एक कसक सी थी । निर्भया के पिता बद्रीनाथ ने कहा कि जिस बच्चे को गोद में पाला उसकी इतनी यादें हैं, उसकी शादी होती, उसका अपना घर होता। लेकिन उसकी तकलीफ के अलावा हमें अब कुछ याद ही नहीं है। मेरी छोटी बहन नानी बन गई है और हम आज भी वहीं खड़े हुए हैं।

निर्भया के पिता ने अपना दुख शेयर करते हुए कहा कि हम कहीं रिश्तेदारी में जाते हैं तो वहां खुशी का माहौल होता है लेकिन हमारी आंखों में आंसू आ जाते हैं। क्योंकि खुशी का वह माहौल देखकर हमें निर्भया की याद आ जाती है । हम वह नहीं बन पाए जो हम बनना चाहते थे। हम अपने पिता का कर्तव्य नहीं निभा पाए। यानी ना हम उसकी शादी कर पाए और ना ही उसके बच्चों को खिलाने का सुख हमें मिल पाया।

बद्रीनाथ ने अंत में कहा कि निर्भया ने जाते-जाते हमसे कहा कि इन सभी को जिंदा जला देना चाहिए। इनको ऐसी सजा दी जानी चाहिए जिससे जो मेरे साथ हुआ वह किसी भी और लड़की के साथ समाज में ना हो । बस संतोष इसी बात का है कि भले ही हमने अपनी बेटी को लेकर देखे तमाम सपनों को चकनाचूर होते हुए देखा हो लेकिन जिस वीभत्स घटना कि वो शिकार हुई उसके अपराधियों को हम सजा दिलवाने में कामयाब हो गए हैं ।


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