इम्तियाज हत्याकांड : अधिवक्ता ने सीबीसीआईडी की जांच पर उठाया सवाल, कहा- केस में कई पुलिस कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । जिले के चर्चित चोपन नगर पंचायत के चेयरमैन इम्तियाज अहमद हत्याकांड में पीड़ित पक्ष की तरफ से मुकदमों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता मो0 अमन खान ने आज रॉबर्ट्सगंज स्थित एक रेस्टुरेंट में प्रेस कांफ्रेंस कर कई सनसनीखेज खुलासे किए ।
इम्तियाज हत्याकांड के केस को लेकर सीबीसीआईडी द्वारा तीन आरोपियों को दी गयी क्लीनचिट को लेकर अधिवक्ता मो0 अमन खान का कहना है कि मृतक का परिवार शुरू से इस जांच पर सवाल उठाता रहा है । उन्होंने बताया कि सीबीसीआईडी द्वारा की जा रही जांच का तरीका शुरुआती दौर से ही संदेहात्मक रहा है। जिस तरीके से वह जांच कर रहा था वह पूरी तरह से आरोपियों को क्लीनचिट देने की मंशा जाहिर कर रहा था। अधिवक्ता ने बताया कि मजे की बात यह है कि एक ही सरकार में दो जांच, दो तरीक़े की रिपोर्ट आती है। जिन आरोपियों को सीबीसीआईडी क्लीनचिट दिया है उन्ही को मजेस्ट्रेटी जांच में दोषी बताया गया है ।
अधिवक्ता मो0 अमन खान ने जाँच अधिकारी पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर मुख्य आरोपी को क्लीन चिट देने का आरोप लगाया है।

हाई कोर्ट के अधिवक्ता मो0 अमन खान ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि सीडीआर से मिली जानकारी के मुताबिक सोनभद्र पुलिस कार्यालय में तैनात तत्कालीन कई पुलिस कर्मियों की बात मुख्य आरोपियों के साथ पिछले कई बार हुई। उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि आखिर ये बात किस परिपेक्ष में हुई यह अभी तक जांच में न तो खुलासा किया गया और न ही जांच में इसे शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि उन्हें सरकार पर पूरा भरोसा है और उन्हें उम्मीद है कि इतनी बड़ी गड़बड़ियां उच्च स्तर पर जानकारी नहीं है, निचले स्तर पर इस तरह की गड़बड़ियां कर सरकार को बदनाम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इतना ही नहीं सीडीआर में कई नम्बरों को हटाकर # का निशान डाल दिया गया है। अंत में उन्होंने केंद्र की किसी जांच एजेंसी से जांच कराए जाने की मांग की है।

बताते चलें कि नगर पंचायत चोपन चेयरमैन इम्तियाज अहमद हत्याकांड की सुपारी कोलकाता में शूटरों को दी गई और 25 अक्तूबर 2018 को चोपन के ग्रेवाल पार्क में शूटरों ने गोली मार कर चोपन नगर पंचायत अध्यक्ष इम्तियाज अहमद की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में राकेश जायसवाल, रवि जालान एवं 6 अन्य के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। शुरुआती जाँच में झारखण्ड के प्रतिबन्धित उग्रवादी संगठन झारखंड जन मुक्ति परिषद के एरिया कमांडर कश्मीर पासवान को घटना स्थल से ही स्थानीय नागरिकों ने पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया था।


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