लखनऊ में हिंसा के आरोपियों के पोस्टर लगाए जाने का मामला : कोर्ट ने सुनवाई कर फैसला सुरक्षित किया

लखनऊ में हिंसा के आरोपियों के पोस्टर लगाए जाने को लेकर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई । चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने सुनवाई के बाद कल तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया । अब कल दोपहर 2:00 बजे कोर्ट फैसला सुनाएगी।

पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हिंसा करने वालों के नाम उजागर करते हुए जिला प्रशासन ने उनके नाम-पते वाले होर्डिग्स लखनऊ में कई जगहों पर लगाए हैं ।

इस मामले को मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर की अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार से पूछा है कि क्या वह सार्वजनिक स्थान और नागरिक आजादी पर अतिक्रमण नहीं कर रही है ।

कार्यकर्ता-नेता सदफ जाफर, वकील मोहम्मद शोएब, थियेटर कलाकार दीपक कबीर और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी एस.आर. दारापुरी उन लोगों में शामिल हैं, जिनके नाम होर्डिग्स पर हैं । सभी जमानत पर रिहा हैं और उन्होंने कहा है कि यदि सरकार उनकी संपत्ति को जब्त करने की कोशिश करती है, तो वे अदालत जाएंगे ।

सरकार के कदम को अनुचित बताते हुए सदफ जाफर ने कहा, “मैं फरार नहीं हूं..हमारे नाम और पते उजागर करना निंदनीय है।”

दीपक कबीर ने कहा, “हमें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और हम जमानत पर रिहा हैं और अब हम पर दबाव डालने की यह नई चाल है । मुझे जेल में रहते हुए वसूली के संदर्भ में नोटिस मिला। मैंने जेल अधीक्षक के हवाले से पत्र भेजकर सवाल किया था कि जेल में रहते हुए मैं कैसे अपने मामले की पैरवी कर सकता हूं। किसी ने मेरी बात नहीं सुनी और उन्होंने वसूली के आदेश दे दिए।”


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