आरटीआई से खुलासा, जीरो टॉलरेंस की सरकार की हकीकत

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

– विपक्ष ने कहा जीरो टॉलरेंस सिर्फ विज्ञापन व मंचों तक सीमित

– जिलाधिकारी द्वारा लिखने के बाद भी बीएसए पर नहीं हुआ कोई कार्यवाही

– प्रभारी मंत्री ने भी कार्यवाही का दिया था भरोसा

– बीएसए पर कार्यवाही न होने से मंत्री के कार्यप्रणाली पर विपक्ष उठा रहा सवाल

– सोनभद्र में शिक्षा व्यवस्था बेपटरी

– नीति आयोग वाले जनपद में शिक्षा का हाल

– मनचाहे विद्यालयों पर पोस्टिंग करने का आरोप

सोनभद्र । सीएम योगी सूबे की शिक्षा व्यवस्था को लेकर जितना गम्भीर हैं उनके अधिकारी व मंत्री तक उतने ही बेफिक्र। एक आरटीआई ने योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस वाली सरकार की पोल खोल दी। अंग्रेजी मीडियम में शिक्षकों के समायोजन में भ्रष्टाचार को लेकर जिलाधिकारी द्वारा लिखने के बाद भी आज तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। जिसे लेकर विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया। विपक्ष का आरोप है कि जिलाधिकारी के लिखने व मंत्री के बयान के बाद भी कोई कार्यवाही न होना सरकार की नियति को दर्शाता है।

जहाँ योगी सरकार ने बजट का एक एक बड़ा हिस्सा शिक्षा पर दिया है ताकि शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर किया जा सके। मगर जिन अधिकारियों के भरोसे सीएम योगी यह सपना देख रहे हैं वहीं विभाग को पलीता लगाने में जुटे हैं। सोनभद्र में एक आरटीआई कार्यकर्ता ने अंग्रेजी मीडियम में समायोजन के नाम अध्यापकों की नियुक्ति शासनादेश के विपरीत किये जाने की शिकायत की थी।

जिलाधिकारी एस0राजलिंगम ने बताया किपूरे मामले की जांच एडीएम से कराई गयी थी। एडीएम की जांच में भी यह साफ हो गया था कि अंग्रेजी मीडियम में जिन अध्यापकों का समायोजन किया गया है वह शासनादेश के विरुद्ध है और भ्रष्टाचार हुआ है। जिसके बाद शासन को बीएसए के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए पत्र लिखा गया है।”

मजे की बात यह है कि इस भ्रष्टाचार को लेकर जिले के प्रभारी व बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने भी लखनऊ पहुंचते ही त्वरित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था। मगर 2 महीने बीत जाने के बाद भी कार्यवाही ना होने से योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस वाली सरकार पर सवालिया निशान लगना शुरू हो गया है।

जिलाधिकारी द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ पत्र लिखे जाने व प्रभारी मंत्री के आश्वासन के बाद भी कार्यवाही ना होते देख आरटीआई कार्यकर्ता ने जिलाधिकारी से इसी को लेकर फिर एक सूचना मांगी, सूचना में जिलाधिकारी ने अपने उस पत्र का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने दिसंबर 2019 में ही बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही के लिए शासन को लिखा था।

आरटीआई कार्यकर्ता संतोष पटेल का कहना है कि “जिले के प्रभारी मंत्री के बाद इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किया जाना यह बताता है कि सब कुछ मिलीभगत से चल रहा है और फिर मंत्री के बातों का कोई महत्व नहीं रह गया।”

वहीं कांग्रेस नेता धीरज पांडेय का कहना है कि “जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली योगी सरकार की कार्यवाही हवा हवाई है। जब जिलाधिकारी द्वारा लिखे जाने के बाद भी सरकार कार्यवाही के लिए गंभीर नहीं है तो यह हो गया है कि सरकार विज्ञापन वह मंचों से जनता के बीच जीरो टॉलरेंस पर बने रहना चाहती है। दुर्भाग्यपूर्ण यह भी है कि यह सब भ्रष्टाचार उस जनपद मेम हो रहा है जहां के प्रभारी मंत्री स्वयं बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री हैं।”


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