केकराही के प्रभारी चिकित्साधीक्षक के खिलाफ स्वास्थ्य कर्मियों ने सीएमओ कार्यालय पर किया प्रदर्शन

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

– पूर्व जांच में प्रभारी चिकित्साधिकारी को क्लीनचिट देने से नाराज हैं स्वास्थ्य कर्मी

– आखिर शिकायतों के बाद भी क्यों नहीं हो रही कार्यवाही

– ज़ब अस्पताल में नहीं है तालमेल तो कैसे होगा मरीजों का इलाज

– स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा- अब लड़ेंगे आर-पार की लड़ाई

सोनभद्र । एक तरफ सरकार महिला उत्पीड़न को लेकर कितनी गंभीर है वहीं दूसरी तरफ सरकारी विभागों में कार्यरत महिलाओं से आये दिन उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती रहती है। एकाध घटनाओं को छोड़ दें तो ज्यादातर मामलों में उच्चाधिकारियों द्वारा मामला दबा दिया जाता है। आज ऐसा ही एक मामला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केकराही का प्रकाश में आया जब केकराही के समस्त स्वास्थ्यकर्मी सीएमओ कार्यालय आ धमके और केकराही के प्रभारी चिकित्साधिकारी को हटाने की माँग करते हुए प्रदर्शन व नारेबाजी करने लगे। अचानक स्वास्थ्यकर्मियों के इस तेवर को देख मुख्य चिकित्साधिकारी सकते में आ गए और जल्द ही कार्यवाही का आश्वासन देकर मामले को संभालने का प्रयास किया। लेकिन स्वास्थ्यकर्मी सीएमओ के ऊपर भी किसी दबाव में केकराही के प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ0 रामकुंवर का पक्ष लेने का आरोप लगा दिया। वहीं स्वस्थ्यकर्मियों ने आर-पार की लड़ाई का एलान करते हुए सीएमओ से केकराही प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ0 रामकुंवर को किसी अन्य विकास खण्ड में तबादला करने की माँग करने लगे।

इस दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ0 अरुण चौबे ने कहा कि “प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ0 रामकुंवर आये दिन डॉक्टर, बीसीपीएम, बीपीएम, स्टॉप नर्स, एएनएम व आशाओं के साथ दुर्व्यवहार व अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते रहते हैं। जिसकी शिकायत पूर्व में भी कई बार की गई है लेकिन मुख्य चिकित्साधिकारी, डॉ0 रामकुंवर के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं किये । उन्होंने बताया कि डॉ0 रामकुंवर औराई से स्थानांतरित होकर सोनभद्र आये हैं और वहाँ भी उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। यहाँ भी उनकी चर्चा शुरू हो गयी है। उनका कहना हैं कि कई बार शिकायत के बाद भी आखिर मुख्य चिकित्साधिकारी किस दबाव में उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं करते, यह बड़ा सवाल है? प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब वे सभी आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे या तो डॉ0 रामकुंवर को हटाया जाए या फिर यहाँ उपस्थित हम सभी लोगों को हटा दिया जाय। उनका कहना है कि वे जनता की सेवा के लिए हैं बार-बार धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते।”

वहीं पीड़ित फार्मासिस्ट सुषमा ने बताया कि “उसके साथ प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ0 रामकुंवर का व्यवहार बहुत ही गलत था। ये मेरे साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते थे और मेरा वेतन बगैर किसी ठोस आधार के काट देते हैं। उसने इसके खिलाफ मुख्य चिकित्साधिकारी से शिकायत भी किया था लेकिन 10 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नही हुई । इसके बाद उसने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री पोर्टल तथा महिला आयोग में भी इसकी शिकायत दर्ज कराई है। आज मुख्य चिकित्साधिकारी की तरफ से मेरे आरोप पत्र पर जवाब में बगैर किसी ठोस प्रमाण होने की बात कह कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया ।
फार्मासिस्ट सुषमा का कहना है कि यदि वह गलत होती तो उसके साथ सभी स्टाफ का समर्थन नहीं होता।”

वहीं पूरे मामले को लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 एस0के0 उपाध्याय ने बताया कि “आज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केकराही के कर्मचारीगण आये थे और वहाँ के प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ0 रामकुंवर के खिलाफ शिकायत कर रहे थे। कर्मचारियों ने एक ज्ञापन कार्यालय में दिया है, उस ज्ञापन का अध्ययन किया जाएगा और नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।”

“अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से दुर्व्यहार करने की बार-बार शिकायत करने के बावजूद भी प्रभारी चिकित्साधीक्षक के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं करना मुख्य चिकित्साधिकारी की जाँच को सवालों के घेरे में खड़ा करता है। बड़ा सवाल ये उठता है कि मुख्य चिकित्साधिकारी किस दबाव में आकर केकराही के प्रभारी चिकित्साधीक्षक के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं करते।”


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