अवैध खनन के खिलाफ बीजेपी नेताओं ने खोला मोर्चा, सरकार की हो रही किरकिरी का करेंगे डैमेज कंट्रोल

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र खनन हादसे में 5 मजदूरों के मौत के बाद न सिर्फ सरकार की किरकिरी हुई बल्कि विपक्ष को भी हमला बोलने का मौका मिल गया । पहले सोने के भंडारण पर और फिर खनन हादसे को लेकर सरकार की लगातार हो रही किरकिरी को बचाने के लिए सोनभद्र में बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है । बीजेपी नेता ने खुलासा करते हुए बताया कि अधिकारी कैसे खनन माफियाओं के साथ मिलकर सरकार की छवि को खराब कर रहे हैं ।

पहले सोनभद्र में 3 हजार टन सोना मिलने की खबर और फिर जीएसआई द्वारा दावे को खारिज किया जाना, इसके बाद ओबरा के बिल्ली मारकुंडी में खनन हादसा, दोनों ही घटनाएं खनन विभाग से जुड़ने के कारण इसकी आंच सीएम योगी तक पहुंचना लाजमी था क्योंकि खनन विभाग सीएम के पास ही है। सीएम पर आंच आयी तो बीजेपी के नेता व कार्यकर्ता अधिकारियों की करतूत से तिलमिला गए और उन्होंने खुद डैमेज कंट्रोल करने के लिए मोर्चा खोल दिया है ।गौर से देखिये इन दो रिपोर्ट को ।

कैसे इन दो रिपोर्ट के आधार पर अधिकारी खनन माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए न सिर्फ मुख्यमंत्री को बल्कि कोर्ट को भी गुमराह कर रहे हैं । खनन विभाग की वजह से सरकार और मुख्यमंत्री की लगातार हो रही किरकिरी को देखते हुए सोनभद्र में बीजेपी के नेताओं ने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है ।

बीजेपी नेता माला चौबे ने खुलासा करते हुए बताया कि सोनभद्र में ना सिर्फ खान अधिकारी बल्कि प्रभारी खनन अधिकारी व अन्य विभागों के अधिकारी का सिंडिकेट खनन माफियाओं के साथ मिलकर काम कर रहा है । उन्होंने बताया कि एक संस्था द्वारा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें यह कहा गया था कि वन विभाग की जमीन पर प्रशासन की मिलीभगत से अवैध खनन किया जा रहा है । इसी जनहित याचिका के आधार पर कोर्ट ने प्रशासन से रिपोर्ट तलब की थी । जिसके क्रम में पहली रिपोर्ट में प्रशासन ने बताया कि जिस जगह पर खनन कार्य हो रहा है वह वन विभाग में विज्ञापित है यानी वन विभाग की जमीन है । मगर मजे की बात यह हैं कि 3 महीने बाद दोबारा उसी जांच टीम द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की गयी जिसमें यह दर्शाया गया कि उक्त जमीन पर हो रहा खनन वन विभाग की जमीन पर नहीं हो रहा । भाजपा नेता का दावा है कि खनन माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए और सरकार को बदनाम करने के लिए 3 महीने में ही रिपोर्ट को बदल दी गई । उनका कहना है कि आखिर जिस जमीन को जांच टीम पहले वन विभाग की जमीन बता रहा था वह आखिर 3 महीने बाद कैसे वन विभाग के दायरे से बाहर आ गया। भाजपा नेता का कहना है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ वे मुख्यमंत्री से भी शिकायत करेंगे और उनके सरकार को बदनाम करने के मंसूबे को पूरा नहीं होने देंगे ।

वहीं कुछ बीजेपी नेताओं का कहना है कि अधिकारी खनन माफियाओं के साथ मिलकर गोरखधंधा चला रहे हैं और सरकार को बदनाम कर रहे हैं । बीजेपी नेता का कहना है कि खदानों के बाहर जो पत्थर स्टॉक किया हुआ है वह किसके आदेश से रखा गया है, क्या उसका परमिशन व परमिट है?

वही इस रिपोर्ट के आधार पर जब जनपद न्यूज़ Live खनन वन विभाग से संपर्क साधा तो वन विभाग के अधिकारी कैमरे पर कुछ भी बोलने से साफ मना कर दिया । मगर खनन अधिकारी के0के0 राय ने यह जरूर माना कि दोनों रिपोर्ट में अंतर है लिहाजा वे अभी कुछ भी नहीं बोल सकते ।

खनन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को देखते हुए सीएम योगी ने इस विभाग को अपने पास रखा था ताकि इस विभाग पर अंकुश लगा सकें । मगर जिस अधिकारियों के भरोसे सीएम योगी विभाग को सुधारना चाहते हैं उन्हीं की वजह से किरकिरी भी हो रही है । ऐसे में बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा डैमेज कंट्रोल के लिए खोला गया मोर्चा कितने को बेनकाब करती है यह तो वक्त ही बताएगा ।


अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
error: Content is protected !!