याद किये गये फ़िराक़ गोरखपुरी उर्फ रघुपति सहाय

फ़ैयाज़ खान (संवाददाता)

ग़ाज़ीपुर । गाजीपुर-अखिल भारतीय कायस्थ महासभा गाजीपुर के तत्वावधान में उर्दू के महान शायर रघुपति सहाय फिराक गोरखपुरी की पुण्यतिथि के अवसर सरजू पांडे पार्क मे‌ विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी आरंभ होने के पूर्व महासभा के सभी कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया ।
गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए महासभा के प्रान्तीय उपाध्यक्ष ‌मुक्तेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए उन्हें हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति का सेतु बताया । उन्होंने कहा कि फिराक गोरखपुरी बीसवीं सदी के वह शायर थे जो आजादी से लेकर प्रगतिशील आन्दोलन तक जुड़े रहे ।उनकी जाती ज़िन्दगी बेहद कड़वाहटों से भरी हुई थी, इसके बावजूद उन्होंने अपने कलाम को इश्क के रंगों से जमाया । वह 1920 में नौकरी छोड़कर स्वराज आन्दोलन में शामिल हो गए । वह राष्ट्रीय आंदोलन में जेल भी गए। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार, पंद्मश्री से भी सम्मानित किया गया । उनकी रूबाईयां बेहद पसंद की गई । उनके जैसा शायर होना बेहद मुश्किल है ।
इस गोष्ठी में मुख्य रूप से महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव, चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव, विरेश्वर सिन्हा, गोरख प्रसाद सिन्हा, अशोक कुमार श्रीवास्तव, शिवशंकर सिन्हा, अमर सिंह राठौर, संजय सेवराई, अजय श्रीवास्तव, राजेशश्रीवास्तव, डॉ सुधीर श्रीवास्तव, गुलाब लाल श्रीवास्तव, अरूण सहाय, मोहनलाल, विजय प्रकाश श्रीवास्तव, सत्यप्रकाश, पियूष, अमरनाथ, आशुतोष आदि उपस्थित थे । इस गोष्ठी की अध्यक्षता महासभा के जिलाध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव एवं संचालन जिला सचिव शैल श्रीवास्तव ने किया ।



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