आइए जानते हैं तुलसी कैसे शरीर के लिए असरकारक औषधि का करती हैं काम


तुलसी में कई ऐसे औषधीय गुण होते हैं, जिससे मौसमी बीमारियों के साथ ही कैंसर जैसी घातक बीमारी में भी संजीवनी का काम करती है। आयुर्वेद में तुलसी की पत्तियों को चबाने से मना किया जाता है। इसका वैज्ञानिक कारण भी है। कई शोध में खुलासा हो चुका है कि तुलसी की पत्तियों के एंटी बॉयोटिक तत्व पाए जाते हैं। www.myupchar.com से जुड़े डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, आयुर्वेद में तुलसी को सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है। इसमें माइक्रोबियल-रोधी, सूजन-रोधी, गठिया-रोधी, लिवर को सुरक्षा देने वाले, डायबिटीज-रोधी और दमा-रोधी गुण पाए जाते हैं। आइए जानते हैं तुलसी कैसे शरीर के लिए असरकारक औषधि का काम करती है –

इसलिए तुलसी को नहीं चबाते हैं:
तुलसी की पत्तियों में काफी मात्रा में लौह तत्व व पारा पाया जाता है, जो हमारे दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है इसलिए आयुर्वेद में तुलसी को चबाने से मना किया गया है। इसके अलावा तुलसी के पत्ते में कुछ मात्रा में आर्सेनिक भी पाया जाता है, जो दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है। यदि प्रतिदिन तुलसी की पत्तियों को चबाएंगे तो मुंह में मौजूद क्षार तत्वों से मिल जाने पर दांतो में सड़न संबंधित खतरा बढ़ जाता है। तुलसी की पत्तियां प्राकृतिक रूप से में थोड़ी अम्लीय यानि एसिडिक होती हैं, जिससे दांतों में दर्द की शिकायत हो सकती है।

त्वचा के लिए अचूक औषधि है तुलसी:
तुलसी में पाया जाने वाला तेल सांस संबंधी बीमारियों में सबसे ज्यादा प्रभावी होता है। आजकल बाजार में तुलसी के पत्तों से बने कई सारे ब्यूटी प्रोडक्ट भी आने लगे हैं, जो चेहरे को निखारने के साथ ही कील-मुंहासों को भी खत्म करने की क्षमता भी रखते हैं। तुलसी त्वचा में निखार लाने में अहम भूमिका निभाती है।

इम्यून सिस्टम को बेहतर करती है तुलसी:
आपको ये जानकर हैरान होगी कि तुलसी मानसिक तनाव को कम करने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी ठीक करती है। अनेक शोध में पता चला है कि तुलसी में एंटी-स्ट्रेस गुण पाए जाते हैं। इसके अलावा तुलसी शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को भी संतुलित करती है। गौरतलब है कि कोर्टिसोल एक प्रकार का हार्मोन होता है, जिसका संबंध मानसिक तनाव से होता है। तुलसी से श्वसन संबंधी बीमारियों, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों आदि का संक्रमण भी दूर हो जाता है।

वजन कम करने में सहायक:
तुलसी वजन कम करने में सहायक होती है। कई बार देखा जाता है कि तनाव में कुछ मरीजों की भूख बढ़ जाती है और वे ज्यादा खाने लगते हैं, जिससे वजन भी बढ़ने लगता है। चूंकि तुलसी में तनाव को कम करने का भी गुण होता है। इसके चलते यह वजन कम करने में सहायक होती है।

मुंह को साफ करने व छाले ठीक में असरदार:
तुलसी मुंह से संबंधित बीमारियों को भी नियंत्रित करती है। तुलसी के पत्तों के सेवन से मुंह से बदबू, पायरिया, मसूड़ों की बीमारी नहीं होती है। तुलसी में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो मुंह में अवांछित बैक्टिरिया को खत्म कर देती है और मुंह तरोताजा कर देती है। इस कारण मुंह में होने वाले बीमारियां तुलसी के सेवन से दूर हो जाती है।

आंखों की रोशनी बढ़ाती है तुलसी;
इसके अलावा तुलसी में विटामिन ए भी बहुतायत में पाया जाता है इसलिए यह आंखों के लिए भी काफी हितकारी है। लेकिन आंखों में तुलसी का पानी या रस डालने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेनी चाहिए, क्योंकि यह पता लगाना जरूरी है कि तुलसी की किस प्रजाति की पत्तियों का रस आंखों के लिए लाभदायक होता है। अन्यथा कहीं कहीं जंगली तुलसी भी पाई जाती है, जिसका उपयोग करने से आंखों को नुकसान भी हो सकता है।

www.myupchar.com से जुड़े डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, अदरक और तुलसी की चाय के अधिक सेवन से सीने मे जलन, एसिडिटी और पेट में जलन हो सकती है।


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