खनन अधिकारी व अन्य दोषियों पर हो दर्ज हो मुकदमा : देवेंद्र सिंह

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । ओबरा खनन हादसे में मारे गए श्रमिकों के परिजनों को 50 लाख के मुआवजे की मांग और पोस्टमार्टम हाउस पर शवों के सौदा करने वाले खान अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर कांग्रेसियों ने आज जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना दिया और 12 सूत्रीय माँग पत्र सौंप कार्यवाही की मांग की।

इस दौरान कांग्रेस प्रभारी सोनभद्र देवेंद्र सिंह ने कहा कि “इस दुःखद घटना से प्रियंका गाँधी बहुत मर्माहत है। उन्होंने हमें आपकी आवाज बुलंद करने को भेजा है। मृतकों को 50-50लाख व घायलों को 10 लाख मुआवजा देने की मांग योगी सरकार से की। मजदूरों के मौत सारदा मंदिर के सामने बिल्ली मारकुंडी खदान आराजी सं0 4585/4528/4598/4597/4599 के 2.85 हेक्टेयर के खदान मालिक सुरेश केशरी पर मुकदमा न दर्ज कराने का दबाव बनाने वाले खान अधिकारी के0के0 राय पर उचित कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की ही मांग की। इन्हीं अधिकारियों के सहयोग व मिलीभगत से पूर्व से लेकर अब तक खनन क्षेत्र सैकड़ो लाशें निगल चुका हैं। घटना के बाद प्रभारी मंत्री व वरिष्ठ नेताओं का दौरा होता तो है पर नतीजा पूर्व की भांति लीपापोती, दबाव व खरीद फरोख्त तक सिमट कर रह जाता है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है इसलिए कठोर कार्यवाही आवश्यक है।”

कांग्रेस अध्यक्ष राम राज सिंह गोंड ने कहा कि “खनन क्षेत्र में संचालित होने वाली खदानों का खनन विभाग के खनिज सर्वेक्षक द्वारा मासिक अवलोकन रिपोर्ट प्रस्तुत किया जाता है, जिसके पश्चात ही खादान में खनन कार्य सुचारू होता है। इस रिपोर्ट में खदान में खनन कार्य संचालित करने के लिये निर्धारित शर्तों व नियमों के साथ श्रमिकों की सुरक्षा हेतु निर्धारित आवश्यक नियमों व उपकरणों का प्रयोग होते पाये जाने की संतुष्टि रिपोर्ट लगाई जाती है लेकिन यहां सब नियम कानून को दरकिनार कर अधिकारियों की मिलीभगत से चलाया जाता है, उन अधिकारियों पर कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाए। खनन क्षेत्र में एनजीटी के निर्देश पर खनन पट्टे के संचालनकर्ता या पट्टाधारक द्वारा अपने पट्टे में कार्यरत माइन्स मैनेजर, ब्लास्टर, फोरमैन व सारे कुशल व अकुशल श्रमिकों की सूचना जिले के अपर पुलिस अधीक्षक की निगरानी में गठित कमेटी को देनी होती है, जिसके तहत खादान में सुरक्षा मानकों का अवलोकन करके आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाये जा सके लेकिन यहां सारा प्रसानिक अमला सिर्फ धनउगाही तक ही सीमित रहता है। वहीं दूसरी ओर खनन पट्टों में श्रमिकों की सुरक्षा के मद्देनजर गठित ” खान सुरक्षा निदेशालय” की त्रैमासिक अवलोकन रिपोर्ट के पश्चात ही खनन कार्य संपादित किये जाने का नियमावली है जिसका अनुपालन नहीं होता। दुर्घटनाग्रस्त खादान की समाप्ति में केवल 13 दिन शेष रह गये थे, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उक्त खादान में सुरक्षा के आवश्यक उपाय की अन्तिम अवलोकन रिपोर्ट “खान सुरक्षा निदेशालय” द्वारा लगाई गई थी? इसकी भी त्वरित जांच की जानी चाहिए। वहीं लगातार हो रहे खनन हादसों में अब तक सिर्फ कोरम पूरा करने के लिए मुकदमा तो दर्ज हो जाता है पर कार्यवाही नहीं हो पाती है, जिससे पट्टाधारकों व जिम्मेदार अधिकारियों का मनोबल बढ़ता जा रहा ऐसी घटना का बार पुनरावृत्ति न हो इसलिए कार्यवाही आवश्यक है।”

उक्त धरना प्रदर्शन में पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष नामवर कुशवाहा, सेवादल जिलाध्यक्ष कौशलेश पाठक, कन्हैया पाण्डेय, धीरज पांडेय, राजीव त्रिपाठी, आशुतोष दुबे, सोनी गुप्ता, ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, विनोद तिवारी, अमरेश चन्द्र पांडेय, सुनीता तिवारी, अरविंद सिंह, रामानंद पांडेय, दयाशंकर पांडेय, प्रमोद पांडेय, निगम मिश्रा, जितेंद्र पासवान, जितेंद्र पांडेय, हरिशंकर गोंड, राजबली पांडेय, देवेंद्र गुप्ता, बृजेश तिवारी, हरेंद्र पांडेय, स्वतंत्र साहनी, समीम अख्तर, शीतला सिंह, श्रीकांत मिश्रा, गोपला स्वरुप पाठक, बृहस्पति भारती, तारा शुक्ला, प्रदीप चैहान, सत्यदेव पांडेय, पंकज मिश्रा, अवनीश सिंह, मदन श्रीवास्तव, अमरेश देव पांडेय समेत सैकड़ो कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



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