खनन हादसे के बाद मौत पर सियासत शुरू, भाजपा के सहयोगी दल ने भी खोला मोर्चा

आनंद चौबे/कृपा शंकर पांडेय (संवाददाता)

ओबरा खनन हादसे में 5 मजदूरों के मौत के बाद सोनभद्र से लेकर लखनऊ तक राजनीति गर्म हो गयी है ।

रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिले के प्रभारी व बेसिक शिक्षा मंत्री ने खनन क्षेत्र का निरीक्षण किया और मृतक परिवार व घायलों को सहायता राशि का चेक दिया । बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री सतीश द्विवेदी ने कहा कि घटना दुःखद है और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होगी और जो भी दोषी होगा बख्से नहीं जाएंगे ।

वहीं पूर्व खनन मंत्री रह चुके प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ने घटना के लिए सीधे तौर पर सरकार व खनन मालिक को जिम्मेदार ठहराया है । उन्होंने मुख्यमंत्री को ईमानदार बताते हुए कहा कि उनकी अधिकारियों पर पकड़ कमजोर है ।

खनन हादसे में मौत के बाद अपना दल (एस) के विधायक व सांसद ने भी मोर्चा खोल दिया है । विधायक ने तो यहां तक कह दिया कि मुख्यमंत्री जी इसी प्रकार अधिकारियों की सुनते रहे 2022 हाथ से निकल जाएगा । विधायक ने एक बेतुका बयान देते हुए कहा कि मंत्री के घर 50 हजार के इंजेक्शन लगते हैं और यहां मौत की कीमत महज चार लाख दी जा रही है । यदि मुआवजा राशि नहीं बढ़ाया गया तो वे आंदोलन करेंगे ।
जबकि अपना दल के ही सांसद ने कहा कि उनके पत्र का यदि संज्ञान लिया गया होता तो यह घटना नहीं होती । उन्होंने कहा कि अब वे असली राजनीति करके दिखाएंगे ।

यह नजारा उस खदान की है जहां शुक्रवार की शाम एक हादसे में 5 मजदूरों की जान चली गयी और दो मजदूर अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं । मजदूरों की मौत हुई तो बयान लखनऊ से भी आने लगे मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए मुआवजे का ऐलान कर दिया और जिले के प्रभारी मंत्री को तत्काल घटनास्थल पर जाकर निरीक्षण करने का निर्देश देते हुए रिपोर्ट सौंपने की बात कही ।

रविवार शाम जिले के प्रभारी व बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री सतीश द्विवेदी ने घटनास्थल पर जाकर स्थानीय लोगों व प्रशानिक अधिकारियों से बातचीत की।खदान में पहुंचते ही वहां का नजारा देखकर प्रभारी मंत्री नीचे घटनास्थल तक पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा सके और उर से ही देखकर लौट लिए ।

बाद में प्रभारी मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और कोई दोषी बख्सा नहीं जाएगा । वे खुद रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे ।उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि के बारे में भी बताया ।

जनपद दौरे पर आए प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व खनन मंत्री रह चुके शिवपाल यादव ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर सरकार व खनन मालिक को जिम्मेदार ठहराया । उन्होंने मृतक परिवारों को 50 लाख मुआवजे देने की मांग की । शिवपाल यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ईमानदार है मगर उनकी अधिकारियों पर पकड़ कमजोर है, इसलिए भ्रष्टाचार बढ़ रहा है ।

5 मजदूरों के मौत के बाद भाजपा के सहयोगी दल अपना दल (एस) ने भी मोर्चा खोल दिया है । अपना दल एस से दुद्धी विधायक हरिराम चेरो ने यहां तक कह दिया कि यदि मुख्यमंत्री जी इसी प्रकार अधिकारियों की सुनते रहे तो 2022 हाथ से निकल जाएगा।दुद्धी विधायक यहीं नहीं रुके, उन्होंने एक विवादित बयान देते हुए कहा कि मुआवजे की राशि कम है, मंत्रियों के घर तो 50 हजार के इंजेक्शन लगते हैं और आदिवासियों को इतनी मुआवजा दी जाती है । उन्होंने कहा कि यदि मुआवजे की राशि नहीं बढ़ाई गई तो वह खुद आंदोलन करेंगे ।

वहीं अपना दल (एस) के सांसद पकौड़ी लाल कोल ने कहा कि यदि उनके पत्र को पहले संज्ञान ले लिया गया होता तो यह घटना नहीं घटती । लेकिन वे किसी को बख्शेंगे नहीं और अब असली राजनीति करके दिखाएंगे ।

मौत पर राजनीति भले ही शुरू हो गयी हो मगर अधिकारियों की लापरवाही की वजह से न सिर्फ 5 गरीब परिवारों का चिराग बुझ गया बल्कि उनकी होली हमेशा के लिए बदरंग कर दी ।
अब देखने वाली बात यह है कि रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री क्या एक्शन लेते हैं ।

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