जब माता सती ने भगवान श्री राम की परीक्षा को सीता का रूप किया धारण

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)

– हरनाकछार में मलिया नदी के पावन तट पर चल रहे श्री राम चरित मानस नवाह परायण महायज्ञ का छठें दिन राम कथा का आयोजन

विंढमगंज । राँची रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे हरनाकछार ग्राम पंचायत में मलिया नदी के तट पर चल रहा विष्णु महायज्ञ के आज पांचवे दिन बुंदेलखंड से आई हुई विद्वान वक्ता निशा सिंह ने दोपहर के बाद लगभग 4:00 बजे से प्रवचन प्रारंभ की। इस मौके पर उन्होंने श्री राम कथा के कई प्रेरणादायी प्रसंगों और तथ्यों की अमृत वर्षा की। कथा में एक प्रसंग अति रोचक रहा जब श्री महादेव शंकर की पत्नी सती श्री राम जी की परीक्षा लेने के लिए सीता बन गयी थीं।

कथा में वक्ता निशा सिंह कहती हैं कि हुआ यूं था कि आतातायी रावण को समाप्त करने के लिये देवों ने रामचरित्र नाटक की व्यूह रचना की गई थी। जिसके प्रमुख पात्र भगवान राम थे जबकि भगवान शंकर इस नाटक के डायरेक्टर थे। पूर्व नियोजित इस देव योजना के अनुसार मां सीता का हरण हो जाता है। भगवान राम भाई लक्ष्मण के साथ जंगलों में व्याकुलता पूर्वक सीता को ढूंढ रहे हैं। रो रहे हैं। तड़प रहे हैं।

सीता के वियोग में उनका रोम-रोम कलप रहा है। वे दीन-दुखियों की तरह पेड़-पौधों, नदी-झरनों, पशु-पंक्षियों से गिड़गिड़ाते हए सीता की पता पूछ रहे हैं। उसी वक्त भगवान शंकर मां सती के साथ वहां से गुजर रहे थे। भगवान शंकर सामने न आकर दूर से ही प्रभु राम को प्रणाम किया और मन ही मन हंसने लगे। सती आश्चर्य चकित थी। उसने भगवान शंकर से पूछा कौन है यह जिसे आपने प्रणामकिया। शंकर जी ने कहा कि यह प्रभु श्री राम हैं।
शंकर जी के हंसने का कारण यह था कि उन्होंने नाटक का जो स्क्रिप्ट तैयार किया था उससे भी अच्छा अभिनय श्री राम कर रहे थे। ये बात सती को पता नहीं था। उन्होंने फिर शिवशंकर को टोका और कहा कि यह कोई भगवान नहीं पागल दिखता है। यदि यह भगवान राम हैं तो इनकी मैं परीक्षा लुंगी। मां सती सीता के वेष में राम जी की ओर बढ़ी।
राम को लगा लक्षमण सचमुच इन्हें अपनी भाभी न समझ ले। इस कारण उन्होंने लक्ष्मण को इशारा कर दिया। सती जब सामने आईं तो लक्ष्मण जी आगे बढ़ गए और सती से कहा आप मेरी सीता भाभी नहीं हैं। सती जिद करने लगी कि मैं ही सीता हूं। तब लक्ष्मण जी कहते हैं हमारी सीता भाभी सदैव भैया राम के पीछे-पीछे चलती हैं और आप सामने से आ रही हैं।
यह आचरण और व्यवहार हमारी सीता भाभी का नहीं है। तब प्रभु श्री राम सामने आये और सती को पहचान लेने की बात कही। कहा कि वेष बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी सती। आपके साथ तो देवों के देव स्वयं महादेव हैं। आपको उनका भी भरोषा नहीं रहा। उनकी बातों पर भी यकीन नहीं किया। उधर सती को भी पराये वेष में भगवान राम का दर्शन नहीं हो रहा था। केवल उन्हें दशरथ पुत्र ही दिखाई दे रहे थे।
उस मौके पर यज्ञ समिति के अध्यक्ष यदुनाथ प्रसाद यादव, हरदेव गुप्ता, मुंशी रवानी, राजेश गुप्ता, राजकुमार यादव, बबली यादव, अमरजीत चंद्रवंशी, सुरेंद्र, गुड्डु गुप्ता, महेंद्र प्रसाद, अभिषेक गुप्ता, राजू भगत, अमरेश चंद्र गुप्ता, संपूर्णानंद, बिनोद गुप्ता, बंशीधर, देवनाथ गुप्ता सहित विंढमगंज थाने की प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद थी।
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