ओबरा खनन हादसे के लिए जिम्मेदार कौन ? सांसद के वायरल पत्र से उठे कई सवाल

कृपा शंकर पांडेय/घनश्याम पांडेय (संवाददाता)

ओबरा/चोपन । ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी थाना क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब शाम यह जानकारी मिलने लगी कि खदान धसकने से लगभग आधा दर्जन से ज्यादा लोग दब गए। इस हादसे में 2 मजदूर सही सलामत बाहर निकल आए लेकिन उनके कई साथी खदान में ही रह गए । घायल रामपाल की मानें तो लगभग 8-9 की संख्या में वहां पर मजदूर मौजूद थे । ड्रिल का काम चल रहा था कि अचानक ऊंचाई से खदान धसकने लगा और बड़े-बड़े बोल्डर और चट्टान नीचे गिरने लगे। जब तक मजदूर संभलते तब तक कई मजदूर इसके चपेट में आ गए । मगर संयोग अच्छा था कि रामपाल और उसका 1 साथी मौके से बच निकला । मगर कुछ दूर जाकर दोनों बेहोश हो गए । दोनों को स्थानीय लोगों ने परियोजना के अस्पताल में भर्ती कराया । जहां प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें चोपन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया । वहां घायलों की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया ।

घटना की जानकारी होने के बाद प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मच गया । जिलाधिकारी समेत एडीएम, एसडीएम व पुलिस के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और घटनास्थल पर पहुंचकर जानकारी हासिल की । खदान की गहराई व वहां का नजारा देखकर जिलाधिकारी भी दंग मान गए । पहली बार खनन क्षेत्र में पहुंचे अधिकारी भी यह सोचने को मजबूर थे कि आखिर यह खदान कैसे चल रही है और यहां कैसे मजदूर काम करते होंगे । जिलाधिकारी भी काफी देर तक लोगों से जानकारी लेते दिखे । बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक घटनास्थल पर 6 मजदूर काम कर रहे थे जिसमें से 2 मजदूर बाहर निकल गए मगर 4 मजदूरों के अभी भी दबे होने की आशंका है । उन्होंने बताया कि फिलहाल रेस्क्यू जारी है और हम प्रयास कर रहे हैं कि यदि कोई दबा है तो मौके से सभी को बाहर निकाला जाए ।

पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी कि यह खदान किस स्थिति में चलाई जा रही थी और मजदूरों के सेफ्टी का ध्यान कितना रखा गया था । जिलाधिकारी ने बताया कि मजदूरों का पंजीयन था अथवा नहीं । लेकिन अभी सबसे ज्यादा जरूरी रेस्क्यू ऑपरेशन का है जो लगातार जारी है ।

युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष आशु दुबे ने कहा कि प्रशासन की मिलीभगत से चल रहे खनन की देन यह हादसा है । उन्होंने घायलों को 2 लाख व यदि कोई मृत होता ही तो 20 लाख का मुवावजा प्रशासन दें ।

वहीं सोशल मीडिया पर सांसद पकौड़ी लाल कोल का 15 अक्टूबर 2019 का एक पत्र तेजी से वायरल हो रहा है । जिसमें उन्होंने पत्र में इसी खदान के बारे में आशंका जताई थी कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है । अब यह पत्र यदि सही निकला तो प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन सकता है । क्योंकि सांसद ने पत्र के माध्यम से घटना की आशंका पहले ही जता चुके हैं और उन्होंने मजदूरों के मानक न होने की बात भी पहले ही लिखकर बताया था। यदि समय रहते प्रशासन सचेत हुआ होता तो शायद आज यह घटना नहीं होती ।

अब देखने वाली बात यह है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद क्या निकल कर सामने आता है और जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद वे क्या कार्रवाई के निर्देश देते हैं ।फिलहाल सभी को इस बात का इंतजार है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिर रिजल्ट क्या आता है।



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