साठा धान कदापि न लगाये अन्यथा होगी सख्त कार्यवाही

दीनदयाल शास्त्री (ब्यूरो)

पीलीभीत । उच्चतम न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित न्यायधिकरण नई दिल्ली द्वारा दिये गये दिशा निर्देश के अन्तर्गत पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्णतया रोक लगाये जाने के निर्देश है।
जनपद पीलीभीत के कुछ किसानों द्वारा माह जनवरी/फरवरी में धान की नर्सरी डालकर ग्रीष्म कालीन साठा/चाइनीज धान की खेती की जाती है, जिसके कारण पराली जलाने की घटनाओं में वृद्वि होती है, उक्त के अतिरिक्त साठा धान की फसल में उर्वरकों, कृषि रक्षा रसायनो, श्रम की अधिक आवश्यकता पड़ती है तथा हर चैथे-पांचवे दिन सिंचाई के लिए पानी की भी अत्यधिक आवश्यकता होती है,
इससे जहां एक तरफ साठा धान लगाने में लागत भी बढ़ती है वही दूसरी तरफ भू-गर्भ जल का अत्यधिक दोहन होने से भू-गर्भ जल का स्तर भी गिरता है, चूंकि इस मौसम में बर्षा होने की सम्भवना कम या नहीं होती है इसलिए यह फसल अधिकांश रूप से डीजल चालित पम्पों से सिंचाई के साधनों पर निर्भर होती है, जिससे वायु प्रदूषण भी होता है। साठा धान की खेती में भू-गर्भ जल का सीधे उपयोग होता है, जिससे भविष्य में पेयजल के संकट की सम्भावनाओं से इन्कार नहीं मिला किया जा सकता है। भू-गर्भ जल स्तर के लगातार गिरने एवं पर्यावरण प्रदूषण को रोकने तथा खरीफ की फसलों में कीट एवं रोगों के प्रभाव को कम करने एवं भूमि की संरचना को विकृत होने से बचाने, मृदा में हयूमस की मात्रा एवं मृदा की उर्वरता को संरक्षित रखने हेतु साठा धान की खेती, भूमि एवं पर्यावरण के अनुकूल नही है। उक्त के दृष्टिगत जनपद में ग्रीष्म कालीन साठा धान की खेती को जिलाधिकारी द्वारा पूर्णतया प्रतिबन्धित किया जा चुका है, जिसके लिए जिलाधिकारी द्वारा समस्त ग्राम प्रधानों के नाम संदेश भी प्रेषित किए गए है एवं ग्रीष्म कालीन साठा धान को न लगाने हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर 3 एवं 5 फरवरी को ग्राम पंचायत सचिव एवं लेखपालों के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया है।
अतः सभी कृषकगणों को अवगत कराना है कि भ्रम की स्थिति में न रहे, साठा धान कदापि न लगाये अन्यथा की स्थिति में प्रशासन द्वारा सख्त कार्यवाही की जायेगी। कृषकगण साठा धान न लगाये बल्कि साठा धान की फसल के स्थान पर तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी एवं अन्य ग्रीष्म कालीन सब्जियों के साथ दलहनी फसलें यथा उर्द, हरी खाद, मूंग की खेती कम उर्वरक, कम कृषि रक्षा रसायन, कम श्रम, कम सिंचाई तथा कम लगात में करके अधिक लाभ कमाये। अधिक जानकारी के लिए उप कृषि निदेशक पीलीभीत से सम्पर्क कर सकते हैं।



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