तापसी पन्नू-पवेल गुलाटी की फिल्म ‘थप्पड़’ की समीक्षा

बॉलीवुड में घरेलू हिंसा जैसे गंभीर लेकिन उपेक्षित मुद्दे को सिनेमायी परदे पर दिखाने वाली इस फिल्म में मुख्य किरदार के साथ होने वाली हिंसा के नाम पर सिर्फ ‘एक थप्पड़’ ही है। सारा जोर इस बात पर है कि कोई औरत सामाजिक मान्यताओं को कायम रखने भर के लिए पति का एक थप्पड़ भी क्यों बर्दाश्त करे। फिल्म में तापसी पन्नू निभा रही हैं अमृता का किरदार, जो हमारे-आपके घरों की किसी सामान्य गृहणी जैसी ही है।

फिल्म की कहानी:
अमृता अपने पति विक्रम (पवैल गुलाटी) के साथ एक खुशहाल जिंदगी जी रही है। विक्रम अपने करियर को लेकर काफी महत्वाकांक्षी है। वहीं अमृता का एक ही सपना है – विक्रम के सारे सपने पूरे हो जाएं। इस बीच एक दिन एक पार्टी में विक्रम, अमृता पर हाथ उठा देता है। बस। यहीं से अमृता के दिलो-दिमाग का सुकून छिन जाता है। सास (तन्वी आजमी) से लेकर उसकी अपनी मां (रत्ना पाठक शाह) तक उसे यही समझाते हैं कि ऐसी बातें होती रहती हैं और उसे समझौता कर लेना चाहिए। इस बीच विक्रम उसे वापस घर बुलाने के लिए एक कानूनी नोटिस भेजता है। अमृता नामी वकील नेत्रा (माया सराओ) के पास जाती है। नेत्रा भी उसे अपने पति के पास वापस लौट जाने की सलाह देती है। अब अमृता हर तरफ से आ रही इन सलाहों को अपनाएगी या अपने दिल की सुनेगी, यही है फिल्म की कहानी।

तापसी पूरी तरह अमृता के किरदार में रच-बस गई हैं। पवैल गुलाटी भी पत्नी को पंचिंग बैग समझने वाले पति के किरदार में जमे हैं। इन दोनों के अलावा सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं मिश्रा जो तापसी के पिता बने हैं। फिल्म बेहद खामोशी से अपनी बात कहती है। तापसी ने भी खामोशी के जरिये अपने दिल का समंदर उड़ेला है। कहीं तेज बैकग्राउंड म्यूजिक का इस्तेमाल नहीं है। कुछ बात कहने के अपने सलीके की वजह से तो कुछ दो घंटे बाइस मिनट की अपनी लंबाई के चलते, फिल्म की गति कुछ धीमी मालूम होती है।

एक्टिंग-निर्देशन और डायलॉग्स-म्यूजिक:
तापसी पन्नू इस फिल्म में पत्नी का किरदार निभा रही हैं, वह आम औरत की तरह घर-परिवार व पति के लिए सब कुछ करती नजर आ रही हैं। फिल्म में तापसी ही इस फिल्म का कहानी की जान है। उनकी एक्टिंग और उनका एक्सप्रेशन हर समय शानदार लगता है। इस फिल्म में नायिका के रूप मे तापसी को देखकर आपकी निगाहें उन पर ठहरी हुई नजर आएंगी। उसने मुझे मारा पहली बार… नहीं मार सकता, बस इतनी सी बात है’ ये फिल्म का डायलॉग नहीं बल्कि फिल्म का सारांश है। इस डायलॉग को जिस अंदाज में तापसी पन्नू कहती है वह भाव देखने वाला है। इसके बाद एक डायलॉग और है जो फिल्म में जान डाल दी। वह इस प्रकार है- ‘वो चीज जिसे जोड़ना पड़े मतलब वह टूटी हुई है’। फिल्म में पावेल गुलाटी, कुमुद मिश्रा, रत्ना पाठक शाह, तन्वी आज़मी की एक्टिंग शानदार है। सभी पात्रों ने अपने रोल पर फिट और न्याय करते हुए दिख रहे हैं।

फिल्म थप्पड़ के माध्यम से अनुभव सिन्हा समाज पर एक करारा थप्पड़ जड़ते हुए दिख रहे हैं। अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी थप्पड़ एक महिला केंद्रित फिल्म है। घरेलू हिंसा की शुरुआत कैसे होती है यह फिल्म में बखूबी दिखाया गया है जो सच में तारीफ के काबिल हैं। यह फिल्म लिंग भेदभाव हिंसा के खिलाफ है।


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