डायबिटीज से रहेंगे सुरक्षित, अगर अपना लेंगे ये आदतें,जानें

दुनियाभर में लगभग 41.50 करोड़ लोग डायबिटीज से ग्रस्त हैं। यानी हर 11 में से एक व्यक्ति इसकी गिरफ्त में है। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि इनमें से 46 प्रतिशत लोगों को मालूम ही नहीं है कि उन्हें डायबिटीज है। यहां तक कि मोटापे के कारण युवाओं में भी टाइप 2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनसे बचाव के बारे में बता रही हैं मोनिका अग्रवाल

नियमित व्यायाम:
सुबह का व्यायाम बहुत अधिक महत्व रखता है। व्यायाम में खेलकूद को शामिल किया जा सकता है। इससे ऊर्जा बढ़ती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस नियंत्रित रहता है। इससे ग्लूकोज और मेटाबोलिज्म भी नियंत्रित रहता है। सुबह व्यायाम करने से शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। हालांकि अधिक व्यायाम से हमें थकान भी होती है। खेल के साथ थोड़ा व्यायाम ग्लूकोज होम्योस्टैसिस को बनाए रखने में सकारात्मक भूमिका निभाता है। इससे एंडोर्फिन नामक हार्मोन बनता है, जिससे तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। व्यायाम से हमारे नर्वस सिस्टम और मोटिलिटी पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है।

संतुलित पौष्टिक भोजन:
रेस्टोरेंट्स में जाकर खाना खाने, स्ट्रीट फूड्स और खुले में मिलने वाले भोजन का सेवन न करना ही बेहतर है। अगर यह सब पसंद ही है तो सप्ताह का कोई एक दिन तय करें और केवल उसी दिन बाहर का खाना खाएं। बाकी दिनों में आप घर पर बना ताजा खाना खाएं। उचित समय पर उचित मात्रा में संतुलित पौष्टिक भोजन का सेवन डायबिटीज सहित सभी बीमारियों को दूर रखने के लिए जरूरी है। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, कोरोनरी हृदय रोग, मेटाबोलिक सिंड्रोम आदि का मुख्य कारण अस्वस्थ जीवनशैली है। वजन हमेशा कद के अनुपात में ही होना चाहिए।
आदर्श वजन का मतलब है : हाइट-100=वजन

आयुर्वेद के अनुसार:
आयुर्वेद के अनुसार हितभुक, मितभुक, ऋतभुक को ध्यान में रखना चाहिए।

1. हितभुक:
व्यक्ति को केवल स्वस्थ खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए, जो लाभकारी हों और हानिकारक नहीं।

2. मिताभुक:
कभी भी अधिक मात्रा में नहीं खाना चाहिए। व्यक्ति को अपने शरीर के अनुसार भोजन करना चाहिए। हमें अपनी भूख के अनुसार केवल 50% ही खाना चाहिए, जिसमें से 25% हमे सॉलिड फूड खाना चाहिए और बाकी के पेट को खाली रखना चाहिए।

3. ऋतभुक :
मौसम के अनुसार भोजन करना चाहिए। हमें भोजन का सेवन करने के लिए सही समय का भी पालन करना चाहिए। जैसे सुबह के समय प्रोटीन, वसा और पोषक तत्वों से भरपूर नाश्ता करना चाहिए।
भोजन में अच्छी गुणवत्ता वाले मल्टीविटामिन, खनिज, ओमेगा 3 फैटी एसिड और विटामिन डी 3 लें। पोषक तत्व क्रोमियम, विटामिन बी 3 और मैग्नीशियम आदि रक्त शर्करा के नियंत्रण में सुधार करते हैं, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है।

सक्रिय रहना:
सक्रिय रहना और दिन में 8 घंटे काम करना स्वस्थ जीवनशैली के लिए आवश्यक है। शारीरिक या मानसिक कार्य, गतिहीन जीवनशैली से बचने में मदद करता है। गतिहीन जीवनशैली से मोटापा होता है जोकि डायबिटीज का बड़ा कारण है। अत: सक्रियता की जरूरत है। अध्ययनों से भी पता चला है कि स्वस्थ जीवनशैली हमारे आसपास सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखती है। इससे दिमाग भी स्वस्थ रहता है। लगभग 8 घंटे का स्मार्ट वर्क हेल्दी लाइफस्टाइल का प्रतीक है।

नो स्मोकिंग:
धूम्रपान की आदत शरीर के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है। बीड़ी, सिगरेट, गांजा, हुक्का, गुटखा, तंबाकू आदि का सेवन शरीर को धीरे-धीरे खोखला करता है। यही कारण है कि धूम्रपान करने वाले लोगों में डायबिटीज, हार्ट अटैक, मोटापे जैसे रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। जो लोग लंबे समय तक ज्यादा सिगरेट पीते हैं, उन्हें कैंसर का खतरा भी होता है।

योग और प्राणायाम:
योग और प्राणायाम के अपने लाभ हैं। योग और प्राणायाम के अभ्यास से इंसुलिन प्रतिरोध खत्म हो जाता है और इंसुलिन स्राव में सुधार भी होता है। स्वस्थ जीवन शैली के लिए यह हमारी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा होना चाहिए, जिससे डायबिटीज को रोका जा सकता है।

गैजेट्स से दूरी:
मशीनों और गैजेट्स के आने से सभी की जीवनशैली में बदलाव आए हैं। लंबे समय तक टीवी देखने, मोबाइल पर गेम खेलने और रात में देर तक खेलने से बचना चाहिए। स्क्रीन का समय उम्र और काम के अनुसार नियंत्रित किया जाना चाहिए। अन्यथा हम अस्वस्थ जीवनशैली की ओर जा सकते है। सप्ताह में कम से कम 5 दिन, 150 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें। चिकित्सकों के मुताबिक रोजाना सिर्फ 30 मिनट एक्सरसाइज करके आप 100 से भी ज्यादा बीमारियों से बच सकते हैं।

नमक और चीनी कम:
चीनी और नमक का सेवन कम करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप अपने घर के खाने में नमक-चीनी न डालें। बल्कि इसका मतलब यह है कि आप बहुत ज्यादा मात्रा में नमक और चीनी वाले खाद्य पदार्थों का प्रयोग न करें। ऐसे बहुत से फूड्स हैं, जिनमें नमक या चीनी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। मगर लोगों को इसके बारे में पता नहीं होता है।

ज्यादा चीनी वाले फूड्स:
सभी प्रकार की कोल्ड ड्रिंक्स, टोमैटो सॉस, जैम, टॉफी, चॉकलेट्स, मिठाइयां आदि।
ज्यादा नमक वाले आहार : डिब्बाबंद अचार, पैकेटबंद चिप्स, नमकीन, पफ्स, नूडल्स और बाजार में मिलने वाले सभी नमक वाले फूड्स।

नींद में न करें कमी:
गहरी और पर्याप्त नींद लेना शरीर को डिटॉक्सीफाई करने का एक और तरीका है। सोते समय शरीर अपनी मरम्मत ही नहीं करता, बल्कि खुद को रिचार्ज भी करता है। यदि कोई व्यक्ति अनिद्रा या स्लीप एप्निया जैसी नींद की बीमारी से पीड़ित है, तो समय के साथ उसका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। जो लोग चिंता घबराहट के अटैक या तनाव से पीड़ित होते हैं, उनके लिए रात में गहरी नींद सो पाना मुश्किल होता है, जिससे नींद की कमी हो जाती है। इस कारण विषाक्त पदार्थों का निर्माण होता है और स्वास्थ्य प्रभावित होता है। रात में आरामदायक नींद पाने के लिए अपनी जीवनशैली और सोच में कई तरह के बदलाव किए जाने चाहिए।

खूब पानी पिएं:
पानी न केवल प्यास बुझाता है बल्कि कई अन्य कार्य भी करता है। जैसे, पाचन में सहायता, शरीर के तापमान को नियंत्रित करना, पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करना और अपशिष्ट उत्पादों को निकालना आदि। इसलिए शरीर को हाइड्रेटेड रखें। हर 1 या 2 घंटे में एक गिलास पानी पीने से डिटॉक्सीफिकेशन की प्रक्रिया सुचारु रूप से कार्य करती है और विषाक्त पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इस कारण हाइपरटेंशन और मोटापे जैसी समस्या नहीं होती और व्यक्ति शुगर से बचा रहता है। इसलिए, वर्कस्टेशन पर पानी की बोतल रखना एक अच्छा विकल्प होगा।

ध्यान से मिलेगा लाभ:
ध्यान हमारे शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध को कम करता है। मेडिटेशन से कोलेस्ट्रॉल, एड्रेनालाइन और नार एड्रेनालाइन के रूप में तनाव हार्मोन इंसुलिन और ग्लूकोज के स्तर को तेज करके शुगर लेवल को संतुलित करते हैं। ये पाचन सिंड्रोम और शुगर को सामान्य करने में मदद करता है।

रोजाना खाये बादाम:
बादाम खाने से शरीर में ग्लूकोज का स्तर सामान्य रहता है। बादाम ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करते हैं और व्यक्ति को डायबिटीज और दिल संबंधी समस्याओं में फायदा पहुंचाते हैं। रोजाना बादाम के सेवन से शरीर में मैग्नीशियम की कमी भी दूर होती है। टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए बादाम का सेवन बेहद फायदेमंद है।
लाइफस्टाइल से जुड़ी अन्य बीमारियों में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, कैंसर और हाई ब्लड प्रेशर भी शामिल हैं। अगर आप अपनी जीवनशैली में ये बदलाव कर लें, तो डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


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