सोनभद्र में सोने के भंडार की चमक पड़ी फीकी, जीएसआई ने खारिज किया 3000 टन सोने का दावा

आनंद कुमार चौबे की रिपोर्ट

– सोने का भंडार मिलने के बाद डिप्टी सीएम ने बताया था भगवान की कृपा

– भंडारण स्थल तक चमचमाती सड़क बनाने का किया था दावा

– बड़ा सवाल आखिर सोने के भंडारण को लेकर किसके स्तर से हुई चूक

सोनभद्र । 3000 हजार टन सोने का भंडार मिलने के बाद सोनभद्र पूरे देश में सुर्खियों में आ गया । सोने का इतना बड़ा भंडार मिलने के बाद न सिर्फ मीडिया बल्कि सरकार भी आश्चर्य थी । मगर जिला खान अधिकारी के बयान को झुठलाने का किसी के पास कोई आधार नहीं था । क्योंकि बयान देने वाले अधिकारी जिम्मेदार पद पर हैं और खनन से जुड़े हुए हैं । जिला खनन अधिकारी के बयान के आधार पर मीडिया ने जब इसको चलाना शुरू किया तो तो पूरे देश में हड़कम्प मच गया । कोई कहने लगा कि सोनभद्र में मिला खजाना पूरे देश की किस्मत बदल देगा तो कोई दुनिया में भारत को दूसरा सबसे ज्यादा अमीर देश बताने लगा ।

इसी बीच शनिवार को सोनभद्र में एक कार्यकर्ता सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि जब से मोदी जी की दूसरी सरकार बनी है, 40 दिनों तक लगातार सुनवाई कर अयोध्या का फैसला आया और राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ हो गया । वहीं मोदी जिनके संसदीय क्षेत्र में काशी विश्वनाथ मंदिर का कॉरिडोर का कार्य चल रहा है । महाशिवरात्रि पर दोनों ही भगवान की ऐसी कृपा हुई कि हमें स्वर्ण भंडार मिल गया । डिप्टी सीएम ने तो जनता से यहां तक कह दिया कि सोनभद्र का खजाना सिर्फ सोनभद्र या उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश की गरीबी को मिटाएगा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हम भंडारण क्षेत्र में सोने की सड़क तो नहीं बल्कि चमचमाती बेहतरीन सड़क जरूर बनवा एंगे मगर शनिवार देर शाम एक रिपोर्ट ने सोने की चमक को फीका कर दिया यह रिपोर्ट जीएसआई के तरफ से जारी किया गया जीएसआई के अधिकारी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह बताया कि जीएसआई द्वारा सोनभद्र क्षेत्र में अन्वेषण का कार्य लंबे समय से किया जा रहा है और आगे भी जारी रहेगा मगर जिस रिपोर्ट के आधार पर मीडिया में 3000 टन सोना मिलने का दावा किया जा रहा है ऐसी कोई भी रिपोर्ट जीएसआई द्वारा जारी नहीं किया गया। जीएसआई रिपोर्ट आने के बाद एक बार फिर सोनभद्र सुर्खियों में छा गया । मगर अब सोने की चमक फीका पड़ने को लेकर चर्चा में था ।

जिलाधिकारी ने रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए सफाई दी कि जीएसआई की रिपोर्ट की अंतिम रिपोर्ट मानी जाएगी और जीएसआई का रिपोर्ट ही सर्वमान्य होगा जिला अधिकारी का मानना है कि क्योंकि भूकर के क्षेत्र में जानकारी टेक्निकल रूप से जीएसआई के अंतर्गत आता है । इसलिए जीएसआई की रिपोर्ट ही सही है ।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि जीएसआई ने पहले कोई रिपोर्ट नहीं दी थी तो जिले के खान अधिकारी ने 3000 हजार टन सोना होने की इतनी बड़ी बात किस आधार पर बताया था ।

बहरहाल सोने की चमक ने सरकार सहित पूरे देश की उम्मीद को जरूर बढ़ा दिया था । मगर जीएसआई की रिपोर्ट के बाद जिस तरह से जनपद सहित राज्य सरकार की किरकिरी हुई है ऐसे में सरकार क्या कार्यवाही करती है ।


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