3 हजार टन सोने का भंडार वाली सोन पहाड़ी के बारे में जाने इसकी असली कहानी

शशि चौबे/सजंय केसरी (संवाददाता)

डाला । देश की अर्थव्यवस्था को लेकर वित्त विभाग से लेकर इन दिनों चिंतित है और सरकार महंगाई तथा गिरते सेंसेक्स को लेकर विपक्ष के निशाने पर है । ऐसे में केंद्र व राज्य सरकार के लिए एक बड़ी खुशखबरी तब मिली जब केंद्र व राज्य सरकार के भूवैज्ञानिकों ने सूचना दी कि सोनभद्र के कई पहाड़ियों में सोने का अपार भंडार है । इतना ही नहीं भूवैज्ञानिकों ने बताया कि सोनभद्र की धरती ना सिर्फ ऐतिहासिक व तिलिस्मी है बल्कि खजाने का वह रहस्य छिपाए बैठा है जिसके लिए और भी शोध करने की आवश्यकता है । गुरुवार को जिला खनन अधिकारी के साथ लखनऊ की एक भूतत्व विभाग की टीम ने जब जुगैल क्षेत्र का दौरा किया तो वहां भी पोटाश पाए जाने की पुष्टि हो गयी । यानी सोनभद्र को सोनांचल यूं ही नहीं कहा जाता । पहले कोयला की खान फिर बालू व पत्थर का भंडारण ने इसे राजस्व देने के मामले में सूबे के दूसरे स्थान पर पहुंचा दिया लेकिन जिस तरीके से अब यहां सोने का भंडारण के साथ अन्य धातुओं का भंडारण मिला है, वह दिन दूर नहीं जब जनपद सोनभद्र सूबे में सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला जनपद बन जायेगा और देश के मानचित्र में अलग से अंकित किया जाएगा ।

कोन क्षेत्र के हर्दी के अलावा गुरमुरा क्षेत्र के सोन पहाड़ी पर सोने की खान मिलने की खबर से भले ही पूरा देश इसकी चर्चा कर रहा हो मगर यहां के रहने वाले आदिवासियों के लिए यह एक सामान्य सी बात है । गुरुवार को लखनऊ से आई भूतत्व विभाग की टीम सोन पहाड़ी पर पहुंची तो वहां मौजूद लोगों से पूछताछ में बताया कि सोन पहाड़ी नाम के पीछे एक कहनी है । आदिवासियों ने बताया कि बताया जाता है कि सोन पहाड़ी से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर डैम के किनारे कुम्हिया गांव बसा हुआ हैं। जहाँ से कई दशक पहले एक बैगा परिवार की बृद्ध जंगल में जाकर रोजाना जंगली फल तोड़ती व बिनती थी । एक दिन वह इसी पहाड़ी पर कांडा (जंगली फल) की तलाश में गयी तो उसे एक धातु की गुल्ली मिली। जिसे लेकर वह अपने घर चली आयी । दूसरे दिन वह बृद्ध फिर जंगल में उसी पहाड़ी पर गयी तो उसे दोबारा वैसा ही गुल्ली मिली । पहले तो महिला उसे समझ नहीं सकी लेकिन गरीबी व तंगहाल की वजह से वह दोनों गुल्ली को लेकर ओबरा बाजार में किसी दुकान पर गयी और व गुल्ली दिखाई । जिसे वह महिला सामान्य पीला धातु समझ रही थी वह सोना था ।

जिसके बाद इसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई । अदिवासियों की माने तो जब इसकी जानकारी अंग्रजो को हुई तो वे इस पहाड़ी पर खोदाई का कार्य शुरू कर दिए । लेकिन इस बात की कोई पुष्टि नहीं हैं कि उन्हें सोना मिला कि नही । लेकिन इस चर्चा के बाद से ही इस स्थान का नाम सोन पहाड़ी पड़ गया । जिसे गांव की भाषा में सोनपहड़ी के नाम से कहते हैं।

मौके पर मौजूद आदिवासियों ने बताया कि इसी पहाड़ी पर एक मंदिर भी है जहां सोनाइत देव की पूजा होती हैं । जहां आसपास के लोग आते हैं मन्नते भी मानते हैं । और मन्नत पूरी हो जाने पर बली भी चढ़ाते हैं।

बहरहाल 2943.25 टन सोना मिलने की खबर से क्षेत्र के लोग बेहद खुश हैं। उनका मानना है कि इससे जहां देश-प्रदेश का खजाना भरेगा वहीं क्षेत्र का विकास भी होगा ।

आपको बतादूँ कि कुछ दिन पहले इस क्षेत्र में लगातार हेलीकॉप्टर के द्वारा भ्रमण किया जा रहा था । उस समय किसी को इसकी भनक तक नहीं लगा कि आखिर रोज हेलीकाप्टर चक्कर क्यों लगा रहा । हेलीकॉप्टर के चक्रमण की खबर को सबसे पहले जनपद न्यूज लाइव ने प्रकाशित किया था।

बहरहाल गुरुवार जनपद न्यूज लाइव के संवाददाता ने सोन पहाड़ी पर टीम के डायरेक्टर व उनके सहयोगियों से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि यहाँ पर जो गढ्ढे हुए हैं यह वास्तव में काफी वर्षों पहले के हैं । हम लोग इस पर कई दशकों से कार्य कर रहे हैं और कई जगहों पर सतह के नीचे बहुत कुछ पता चला हैं।



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