जनकपुर से माता सीता की बिदाई से आँखे हुई नम

ख्वाजा खान (संवाददाता)

बभनी। बभनी के पोखरा ग्राम स्थित शम्भूनाथ गुप्ता के घर के पास नवद्विवसीय श्रीराम कथा यज्ञ व रामलीला,मन्दिर मे मूर्ती स्थापना प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन मे अयोध्या से आये हुऐ आचार्य व रामलीला कमेटी मंच पर चल रही रामकथा के आठवें दिन कथावाचक व्यास अनिरुद्धाचार्य महाराज ने
राम विवाह और सीता विदाई का भावपूर्ण ढंग से कथा का व्याख्यान किया गया।
सीता स्वयंवर के बाद राजा जनक बारात लाने का आमंत्रण लेकर अपने दूत को अयोध्या भेजते हैं। दूत राजा दशरथ को सीता के स्वयंवर का संदेश देते हैं। इसके साथ ही अयोध्या में खुशी की लहर दौड़ जाती है। राजा दशरथ ने सभी अयोध्यावासियों को बारात में चलने का निमंत्रण देते हैं। दशरथ गुरु विश्वामित्र व अन्य सहयोगी के साथ बारात लेकर राजा जनक के दरबार पहुंचते हैं, जहां राम बारात का भव्य स्वागत हुआ। भगवान श्रीराम एवं माता जानकी का विवाह विधिपूर्वक कराया हुआ।
उनके साथ जनक की अन्य तीन बेटियों के साथ लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की भी शादी रचाई जाती है। माता सीता की जनकपुरी से विदाई होती है। साथ ही सीता के विदाई की कथा के दौरान सभी कथा श्रोताओं की आंखें नम हो जाती हैं।मुख्य यजमान सपत्नी पोखरा ग्राम प्रधान शम्भूनाथ गुप्ता,प्रदुम्न गुप्ता,समेत सैकडो कथा प्रेमी मौजुद रहे।



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