आजाद भारत के विकास की तस्वीर, बता रही विकास की हकीकत

रमेश यादव (संवाददाता)

– खोखा गांव को जोड़ने वाली एक मात्र सड़क की जर्जर स्थिति बनी विकास में बाधा

– बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर, पुराने दौर की जिंदगी जीने को मजबूर ग्रामीण

दुद्धी । तहसील व ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 35 किमी दूर डालापीपर गांव का अति दुरूह राजस्व गांव खोखा पिछले दिनों बालू खनन साइड को लेकर काफी चर्चाओं में रही, तब ग्रामीणों को लगा था कि अब गांव को जोड़ने वाली एक मात्र सड़क की हालत सुधरेगी और एम्बुलेंस सहित अन्य गाड़ियां सरपट दौड़ेंगी ।लेकिन बालू खनन के बन्द होने के बाद ग्रामीणों का सपना टूट गया । क्योंकि आज तक शासन-प्रशासन ने उस गांव की शुद्धि तक नही ली । जिससे ग्रामीण आज भी सड़कों की हालत देखकर विकास की हकीकत बताने को बेबस हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव से बालू खनन के नाम पर सरकार ने करोड़ों रुपये राजस्व जुटाए, उसी गांव के ग्रामीणों को आज बद से बदतर हालत में जीने को छोड़ दिया गया है । ग्रामीणों की माने तो गांव में सरकारी सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नही है। गांव में विद्युतीकरण आज तक नही हो सका है। लिहाजा ग्रामीणों को अंधेरे में ही ढिबरी जला कर रात काटनी पड़ती है। जहां सरकार डिजिटल की बात करती है वहीं इस गांव में मोबाइल का टावर काम नही करता । ग्रामीणों ने जब कही बात करनी होती है कुछ चुनिंदा स्थानों पर पहुंचकर बात करनी होती है । यह भी बताया कि खोखा से 8 किमी पहले बहराडोल तक विद्युतीकरण हुआ है लेकिन यहां अभी तक बिजली नही पहुँची। गांव में तीन हजार की आबादी बेहाल है ।सड़क का बुरा हाल है । सरकार ने हर मुख्य मार्ग से जुड़ने वाली सड़क को पिच करने का आदेश जारी किया था, शायद यहां भी कागजों में चल रहा हो मगर मौके पर सड़क की दुर्दशा के कारण बाहर से आने वाले मेहमान भी कतराते हैं । इतना ही नहीं बीमारी के समय एम्बुलेंस तक गांव में नहीं जाती जिससे कई बार लोगों की जिंदगी फंस जाती है । ग्रामीणों ने बताया कि एम्बुलैंस को फोन करने पर वह बहराडोल में खड़ी हो जाती है और वहां तक ग्रामीणों को अपने मरीज़ो को साइकिल से ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार सुशासन व जीरो टॉलरेंस की बात करती है मगर जमीनी हकीकत जानने का प्रयास नहीं करती।ग्रामीणों में मनीष, मनजीत चेरों, चिंता देवी, मीरा देवी ने कहा कि सिर्फ जनप्रतिनिधि वोट मांगने आते है पर गांव की समस्या पर ध्यान नही देते ।

बता दे कि कनहर नदी के तटवर्ती इलाके में बसे इस गांव में आज भी पीने का पानी लाने के लिए लोग कनहर नदी के धारा से घड़े में पानी लाते है । वही बरसात में बाढ़ के पानी को छानकर पीते है तो वहीं सड़कों की खस्ताहाल को लेकर लोग शादी – विवाह के लिए गांव में आना नही चाहते हैं । जबकि स्कूली बच्चों को पैदल गांव से हाई स्कूल एवं इंटर बी ए के लिए दुद्धी आना जाना पड़ता है । चुकी गांव की सड़कें इतनी खराब है कि छोटी मोटी गाड़ियां भी गांव में जाने से कतराती है ।

बहरहाल शनिवार को उप मुख्यमंत्री व लोक निर्माण विभाग के मंत्री केशव मौर्या का जनपद में दौरा हो रहा है साथ ही इसके बाद दो दिवसीय दौरे पर राज्यपाल भी आएंगी । अब देखने वाली बात यह है कि विकास देखने आ रहे राज्यपाल व उप मुख्यमंत्री को अदिवासियों की समस्याएं दिखती हैं कि नहीं ।

है कि जिस गांव से सरकार को बालू खनन से करोड़ों रुपये राजस्व हासिल हुए उस की हालत कब तक बदलती है ।



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