महाशिवरात्रि आज,भव्य शिव बारात के लिए तैयार कैलाश कुंज द्वार

रमेश यादव ( संवाददाता )

-महाशिवरात्रि को हुआ था माँ पार्वती संग

– भोलेनाथ का विवाह, शिवमंदिरों में उमड़ेगी भीड़
-महाशिवरात्रि को ही प्रकट हुई थे प्रथम शिवलिंग

-आज ही के दिन समुन्द्र मंथन से निकले कालकूट

-विष को महादेव ने अपने कण्ठ में धारण किया था

दुद्धी। महाशिवरात्रि का पर्व आज धूम धाम से मनाया जा रहा है।सुबह से ही शिव भक्तों ने पूजा अर्चना शुरू कर दी ।कहा जाता है कि सत्य ही शिव हैं और शिव ही सुंदर है। तभी तो भगवान आशुतोष को सत्यम शिवम सुंदर कहा जाता है। भगवान शिव की महिमा अपरंपार है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने का ही महापर्व है…शिवरात्रि…जिसे त्रयोदशी तिथि, फाल्गुण मास, कृष्ण पक्ष की तिथि को प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। महाशिवरात्रि पर्व की विशेषता है कि सभी सनातन धर्म प्रेमी इस त्योहार को बड़े ही श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाते हैं।
महाशिवरात्रि की विशेषता व महत्ता को विस्तार से बताते हुए रामलीला कमेटी के महामंत्री आलोक अग्रहरि ने बताया कि इस दिन भक्त जप, तप और व्रत रखते हैं और इस दिन भगवान के शिवलिंग रूप के दर्शन करते हैं। इस पवित्र दिन पर देश के हर हिस्सों में शिवालयों में बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, शर्करा आदि से शिव जी का अभिषेक किया जाता है। देश भर में महाशिवरात्रि को एक महोत्सव के रुप में मनाया जाता है क्योंकि इस दिन देवों के देव महादेव का विवाह हुआ था।
हमारे धर्म शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जगत में रहते हुए मनुष्य का कल्याण करने वाला व्रत है महाशिवरात्रि। इस व्रत को रखने से साधक के सभी दुखों, पीड़ाओं का अंत तो होता ही है साथ ही मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। शिव की साधना से धन-धान्य, सुख-सौभाग्य,और समृद्धि की कमी कभी नहीं होती। भक्ति और भाव से स्वत: के लिए तो करना ही चाहिए सात ही जगत के कल्याण के लिए भगवान आशुतोष की आराधना करनी चाहिए। मनसा…वाचा…कर्मणा हमें शिव की आराधना करनी चाहिए। भगवान भोलेनाथ..नीलकण्ठ हैं, विश्वनाथ है।
हिंदू धर्म शास्त्रों में प्रदोषकाल यानि सूर्यास्त होने के बाद रात्रि होने के मध्य की अवधि, मतलब सूर्यास्त होनेके बाद के 2 घंटे 24 मिनट की अवधि प्रदोष काल कहलाती है। इसी समय भगवान आशुतोष प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते है। इसी समय सर्वजनप्रिय भगवान शिव
और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यही वजह है, कि प्रदोषकाल में शिव पूजा या शिवरात्रि में औघड़दानी भगवान शिव का जागरण करना विशेष कल्याणकारी कहा गया है। हमारे सनातन धर्म में 12 ज्योतिर्लिंग का वर्णन है। कहा जाता है कि प्रदोष काल में महाशिवरात्रि तिथि में ही सभी ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव हुआ था। महाशिवरात्रि के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए श्री रामलीला कमेटी के महामंत्री आलोक अग्रहरि ने कहा कि देवों के देव भगवान भोले नाथ के भक्तों के लिए महाशिवरात्रि का व्रत विशेष महत्व रखता है। खासकर महाशिवरात्रि पर मंदिरों में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान शंकर और मां पार्वती का विवाह हुआ था और इसी दिन पहला शिवलिंग प्रकट हुआ था। साथ ही महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव ने कालकूट नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था, जो समुद्र मंथन के समय बाहर आया था ।
इस साल यह शुभ व्रत आज शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस दिन व्रत रखने से भगवान भोले नाथ शीघ्र प्रसन्न होकर उपवासक की मनोकामना पूरी करते हैं। इस व्रत को सभी स्त्री-पुरुष, बच्चे, युवा, बुजुर्ग करते हैं। इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने पर और शिवपूजन, शिव कथा, शिव स्तोत्रों का पाठ व “ऊं नम: शिवाय” का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता हैं. व्रत के दूसरे दिन यथाशक्ति वस्त्र-क्षीर सहित भोजन, दक्षिणा दिया जाता है।
दुद्धी तहसील मुख्यालय पर महादेव शिव की बारात प्राचीन शिवाला मन्दिर से निकल कर कैलाश कुंज द्वार मल्देवा जायेगी जहाँ भगवान भोलेनाथ व माँ पार्वती के प्रतीकात्मक विवाह रश्म होगा। यही नजारा हीरेश्वर मन्दिर बीडर पर भी होगा। कैलाश कुंज मल्देवा,हीरेश्वर मन्दिर बीडर,लौआ पहाड़ी मन्दिर,रेघड़ा मन्दिर घिवही, पर मेला का भी आयोजन होगा।


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