सीढ़ी लगाकर करते हैं पूल पार

फ़ैयाज़ खान (संवाददाता)

गाजीपुर । सादात सपा सरकार में करोड़ों की लागत से बेसो नदी पर बने पुल पर एप्रोच मार्ग के निर्माण न होने से बेमतलब साबित हो रहा है। इस पर आवागमन आज तक शुरू नहीं हो सका है। पुल बनने के बाद भी नदी में पानी अधिक होने पर इससे पैदल आना-जाना भी बंद हो जाता है। रास्ता न होने की स्थिति में पुुल के सहारे किसान सीढ़ी खड़ा कर पुल पार करते हैं और खेेेती का काम करके पुुुुन: सीढ़ी से वापस आते हैं। चार खंभों पर बने इस पुल की लंबाई उत्तर-दक्षिण में करीब 58 मीटर है। यह पुल सराय सदकर गांव से गोरारी को जाने वाली सड़क के बीच जून 2017 में बनकर तैयार हुआ था।
गंगा की सहायक नदी बेसो मनिहारी विकास खंड के सराय सदकर गांव के उत्तरी तरफ बहती है। सपा सरकार में विधायक रहे सुब्बा राम ने ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए वर्ष 2015 में बेसो नदी पर पुल बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। शासन की स्वीकृति के बाद 38 मीटर लंबी पुल के लिए तीन करोड़ 34 लाख रुपये आवंटित किया गया था। पुल तेजी से बनना शुरू हुआ और वर्ष 2017 में बनकर तैयार भी हो गया। इसके लिए नदी पर पुल बनने के बाद भी इसका दक्षिणी सिरा सड़क से नहीं जोड़ा जा सका।
आलम यह है कि नदी में जबतक पानी नहीं रहता है अथवा पानी कम रहता है, तबतक लोग नदी से होकर आते-जाते हैं, लेकिन जैसे ही पानी बढ़ता है, आवागमन बंद हो जाता है। ऐसी स्थिति में क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। वर्तमान में पुल की स्थिति यह है कि यह उत्तर तरफ से सड़क से जुड़ा हुआ है। जबकि दक्षिण तरफ पुल को सड़क से नहीं जोड़ा गया है। पुल की ऊंचाई से करीब 15 फीट नीचे तक ही मिट्टी फेंकी गई है।
सराय सदकर गांव के किसान विकास मिश्रा ने बताया कि नदी में पानी अधिक होने पर क्षेत्र के किसान परेशान हो जाते हैं। उनके खेत नदी के उस पार होने से वह खेती करने उस पार नहीं जा पाते हैं। वैसे पुल के उत्तरी छोर को सड़क से जोड़ दिया गया है, लेकिन विवाद के कारण दक्षिणी सिरे को नहीं जोड़ा जा सका है। किसानों ने दक्षिणी सिरे पर पुल के सहारे 15 फीट की सीढ़ी खड़ा कर दी है, जिसके सहारे किसान पुल के ऊपर चढ़ते-उतरते हैं। पुल का निर्माण सेतु निगम द्वारा कराया गया था। निवर्तमान ठेकेदार विजय यादव ने बताया कि पुल से जोड़ने के लिए सड़क का प्रस्ताव पीडब्लूडी विभाग से उप जिलाधिकारी जखनियां को भेजा गया है। बहुत जल्द किसानों को मुुआवजा देने के बाद कार्य आरंभ होगा।



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