सिपाही भर्ती में इण्टरमीडिएट सर्टिफिकेट देने पर जाँच कर नियुक्ति पर निर्णय लेने का निर्देश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांस्टेबल भर्ती 2018 में इंटरमीडिएट का प्रमाण पत्र दाखिल न कर पाने वाले अभ्यर्थी को राहत देते हुए पुलिस भर्ती बोर्ड को निर्देश दिया है कि याची के दस्तावेजों की जांच कर उसे नियुक्ति दी जाए। गोरखपुर के रत्नेश यादव की याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने सुनवाई की। याचिका पक्ष रख रहे अधिवक्ता का कहना था कि याची ने 11 दिसंबर 2019 को दस्तावेज सत्यापन के लिए पुलिस लाइन गोरखपुर में अपने शैक्षणिक दस्तावेज प्रस्तुत किए। इनमें हाई स्कूल, इंटरमीडिएट के अंकपत्र व हाई स्कूल का प्रमाण पत्र था। याची के पास उस समय इंटरमीडिएट का प्रमाण पत्र नहीं था। उसके अनुरोध पर अधिकारियों ने उसे मौका दिया और याची ने 1 घंटे बाद इंटरमीडिएट का प्रमाण पत्र भी जमा कर दिया। इसके बावजूद उसका नाम चयन सूची में नहीं शामिल किया गया। हाई कोर्ट ने इस मामले में पुलिस भर्ती बोर्ड से जवाब मांगा था । बोर्ड की ओर से कहा गया कि विज्ञापन में यह प्रावधान था कि आनलाइन आवेदन के समय याची के पास सभी शैक्षणिक दस्तावेज होनी चाहिए। आवेदन के समय सभी दस्तावेज जमा न कर पाने की वजह से सूची में शामिल नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि यदि याची ने अपने अंक पत्र जमा किए थे तो यह माना जाएगा कि उसके पास प्रमाण पत्र भी होगा। सिर्फ प्रमाण पत्र न होने के आधार पर चयन से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा याची द्वारा प्रस्तुत इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र की जांच करने के बाद उसकी नियुक्ति पर 4 सप्ताह में निर्णय लिया जाए।


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