शौच के लिए दर-दर भटकते राहगीर

शशि चौबे / संजय केसरी (संवाददाता)

डाला । सैकडों व्यापारिक प्रतीष्ठानो के बीच आमजन के रोज डाला बाजार में शुलभ शौचालय नहीं होने से शौच संबंधी लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
चोपन विकासखंड के कोटा ग्राम पंचायत के डाला क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य ग्राम का जहां प्रमुख बाजार के रूप में स्थित है वही डाला बाजार में सैकड़ों दुकानदार सड़क के आसपास के व्यापारिक प्रतिष्ठान स्थापित है वहीं प्रतिष्ठानों पर आए दिन ग्राहकों की आवागमन दूरदराज से होती रहती है उसी बीच आसपास के आए हुए ग्राहकों को कभी शौच संबंधी आवश्यकता पड़ने पर बाजार में अगल बगल झांकते नजर आते हैं जहां डाला को नगर पंचायत बनाने को लेकर कई समाजसेवियों के द्वारा लगातार धरना प्रदर्शन व सरकार से मांग करते रहे हैं वहीं मुख्य बाजार में एक शुलभ शौचालय नहीं होने से लोगों को शौच संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है वहीं भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन के तहत खुले में शौच को रोकने के लिए जहां प्रदेश सरकार लगातार धन आवंटित कर क्षेत्र में खुले में शौच मुक्त करने की योजनाएं चलाती रही है वहीं उस योजनाओं का असर डाला क्षेत्र में दिखता नजर नहीं आ रहा जिसके कारण आमजन को शौच संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है नगर में चार बैंक और आधा दर्जन स्कूल सप्ताहिक बाजार वाले नगर के बीच शुलभ शौचालय नहीं होना स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ाने के बराबर है इस संबंध में व्यापारियों का कहना है कि शुलभ शौचालय बाजार में होना अत्यंत आवश्यक है समस्या पर ग्राम पंचायत व विकासखंड ध्यान नहीं दे रहा। वहीं जिला पंचायत सदस्य सुभाष पाल का कहना है। मैने प्रस्ताव किया था शुलभ शौचालय स्वीकृति होने के बाद स्थान नही मिलने से शुलभ शौचालय निर्माण नही हो सका। बरहाल जो भी हो एक शुलभ शौचालय इतने बड़े बाजार मे ना होना भारत सरकार के खुले में शौच मुक्त अभियान को सफल होता नही दिख रहा है।

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