एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट के जनवरी माह की डेल्टा रैंकिग जारी, नवें पायदान पर सोनभद्र

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । महत्वाकांक्षी जनपदों में नीति आयोग द्वारा सुझाये गए सुधारात्मक उपायों का प्रयोग करते हुए जनपद सोनभद्र शिक्षा क्षेत्र में उत्तरोत्तर सुधार करते हुए जनवरी माह के डेल्टा रैंकिंग में देश के 112 जनपदों में नौवां स्थान अर्जित करने में सफलता अर्जित की है। नीति आयोग ने शिक्षा क्षेत्र में आठ नीति सूचक चिन्हित किये हैं जिनके सुधार के साथ जनपद के शैक्षिक गुणवत्ता के साथ विद्यालयों की अधोसंरचना में अपेक्षित परिवर्तन प्रदर्शित हो रहा है। इन नीति सूचकों पर लक्ष्य के सापेक्ष कार्य करने के लिए नीति आयोग जनपदों को अंक प्रदान करता है| पहला सूचक छात्रों के कक्षा 5 से कक्षा 6 और कक्षा 8 से कक्षा 9 में शत प्रतिशत नामांकन के लिए है, जिसके लिए 20% अंक निर्धारित हैं। जिसके लिए स्कूल चलो अभियान, हर दिन स्कूल चलें, मिशन स्कूल कायाकल्प जैसे कार्यक्रम चलाये गए और इस सूचक में परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में ट्रांजीशन लगभग 10% की अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी।

बालिका शिक्षा को गंभीरता से लेते हुए समस्त परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों में क्रियाशील शौचालय का होना सुनिश्चित कराया जाना शिक्षा क्षेत्र का दूसरा महत्वपूर्ण सूचक है जिसके लिए 5% अंक निर्धारित हैं। माध्यमिक विद्यालयों में पेयजल आपूर्ति और विद्युतीकरण के लिए 5% अंक प्रदान किये जाते हैं| जनपद के महत्वाकांक्षी श्रेणी में सम्मिलित होने के समय मात्र 62 % विद्यालयों में क्रियाशील शौचालय मौजूद थे। विभागीय समन्वय से जनपद स्तर के प्रयास से माध्यमिक विद्यालयों में पेयजल 55% से 100% और विद्युतीकरण बल्कि 56% से 100% कर लिया गया है। जनपद ने माध्यमिक के लक्ष्य से आगे बढ़कर परिषदीय विद्यालयों में भी पेयजल और विद्युतीकरण को संतृप्त करा लिया है। अनिवार्य अधोसंरचना वाले सूचकों पर कार्य हुए जनवरी 2019 की डेल्टा रैंक में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए जनपद सोनभद्र को नीति आयोग द्वारा 6 मार्च 2019 को सम्मानित भी किया गया था। वर्तमान में प्रदेश सरकार के स्कूल कायाकल्प के तहत समस्त परिषदीय विद्यालयों को भौतिक संसाधनों से पूर्ण किया जा रहा है। ब्लैक बोर्ड से लेकर बाउंड्री वाल तक का सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार किया जा रहा है जिसे 31 मार्च से पूर्व कराने के लिए विभागीय समन्वय और यूनिसेफ का सहयोग लिया जा रहा है।

परिषदीय विद्यालयों में सत्रारंभ पुस्तकों को उपलब्ध करवाने में सफलता मिली है जहाँ पहले पुस्तकें सत्रांत तक वितरित हुआ करतीं थीं, अब प्रथम माह में ही वितरित होने लगी हैं और वैकल्पिक तौर पर बुक बैंक की स्थापना करवाई जा चुकी हैं इस आठवें सूचक के लिए 4% अंक निर्धारित किये गए हैं।

जनपद सोनभद्र के सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त शिक्षकों का अभाव रहा है जिसके कारण जनपद के मात्र 36% विद्यालयों में आरटीई 2009 के अनुसार छात्र शिक्षक अनुपात से संतृप्त विद्यालय थे, जिसके कारण विद्यालयों में छात्रों का अधिगम स्तर प्रभावित हो रहा था और विद्यालयों का संचालन करवाना जटिल हो गया था। प्रत्येक वर्ष होने वाले अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण के कारण सोनभद्र में शिक्षकों की संख्या प्रत्येक वर्ष कम होते जा रही थी, ऐसे में जनपद द्वारा बन रही कार्ययोजना में इसके लिए कुछ क्रमिक उपाय निर्धारित किये गए जिसमें महत्वाकांक्षी जनपद से शिक्षकों के अंतर्जनपदीय स्थानातरण पर नियंत्रण करना, एक किलोमीटर से कम दूरी पर बने विद्यालयों का सविलयन, एक ही प्रांगण में मौजूद प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का सविलयन और छात्र संख्या के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति सुझावों को सम्मिलित किया गया। विगत 3 वर्षों से अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण में लगभग 1000 शिक्षकों ने प्रतिभाग करने का आवेदन किया था लेकिन जनपद में लौटने के लिए आवेदन करने वालों की संख्या दहाई तक ही सीमित रही।

सत्र 2018-19 में सोनभद्र को 998 नए शिक्षक प्राप्त हुए जिनकी नियुक्ति एकल विद्यालयों पर की गयी, जिससे जनपद में विद्यालयों पर नियुक्त किया गया जिसके परिणाम स्वरुप छात्र शिक्षक अनुपात 36% से बढकर 48% तक पहुँच गया और 2019-20 में जिला अधिकारी के निर्देश से ऐसे प्रारंभिक विद्यालयों की सूची तैयार की गयी जिनमें आरटीई मानदंडों के अनुसार शिक्षकों की संख्या ज्यादा अथवा कम है। जिले के भीतर शिक्षकों की पुनः तैनाती की गयी ताकि अधिकतर विद्यालयों में आरटीई मानदंडों के अनुरुप अपेक्षित संख्या में शिक्षक लगाये जा सकें। जिससे वर्तमान में 14% की वृद्धि के साथ जनपद के लगभग 50% विद्यालय आरटीई मानदंडों के अनुसार छात्र शिक्षक अनुपात से आच्छादित हो चुके हैं। शिक्षा मंत्री डॉ0 सतीश चन्द्र द्विवेदी जो जनपद सोनभद्र के नोडल भी है ने महत्वाकांक्षी जनपदों में नए शिक्षकों की नियुक्ति को प्राथमिकता देने की बात कही है, जिससे शेष विद्यालय भी अगले सत्र में संतृप्त हो जायेंगे। वर्तमान में लगभग 4500 नए शिक्षकों की आवश्यकता है।
अगर सभी आठ सूचकों पर जनपद सोनभद्र की प्रगति देखी जाये तो शिक्षा क्षेत्र में 2018 में 35% अंक के साथ देश में 91वें स्थान पर रहने वाला जनपद वर्तमान में 61% अंक के साथ प्रथम श्रेणी से डेल्टा रैंक में 9वें स्थान पर आकर अपनी महत्वाकांक्षा को हासिल कर रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में बेसलाइन रैंक और अर्जित भारांक 2018 –
रैंक प्रदेश जिला अंक
57 उत्तर प्रदेश चंदौली 45.67%
59 उत्तर प्रदेश फतेहपुर 45.39%
86 उत्तर प्रदेश चित्रकूट 37.93%
91 उत्तर प्रदेश सोनभद्र 35.04%
96 उत्तर प्रदेश बलरामपुर 30.91%
98 उत्तर प्रदेश सिद्धार्थनगर 28.92%
100 उत्तर प्रदेश बहराइच 22.90%
101 उत्तर प्रदेश श्रावस्ती 18.96%



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