बिना झुके मनुष्य को किसी भी चीज की प्राप्ति संभव नहीं” : राजन महाराज

मनोज वर्मा (संवाददाता)

– पिपरी में राम कथा का बाबा आयोजन, 10 दिनों तक चलेगा राम कथा

रेनुकूट । नगर पंचायत पिपरी द्वारा राम कथा का आयोजन 15 फरवरी से आरंभ हो गया जिसमें विश्व ख्याति प्राप्त परम पूजनीय श्री राजन जी महाराज द्वारा राम कथा सुनाया जा रहा है। कथा पाठ के प्रथम दिन महाराज ने कथा प्रेमियों को बताया मनुष्य को बिना झुके हुए किसी भी चीज की प्राप्ति संभव नहीं है जिसका उदाहरण उन्होंने आसमान में उड़ रहे हवाई जहाज का दिया हवाई जहाज में बैठे सभी यात्री जब तक हवाई जहाज आसमान में उड़ता रहता है सांस रोके बैठे रहते हैं। जब तक वह जमीन पर नहीं आ जाता किसी को चैन नहीं मिलता इस उदाहरण में अपने आपको भी उन्होंने शामिल किया महाराज ने कहा जब भी हवाई यात्रा करता हूं तो जब तक जमीन पर जहाज नहीं आ जाती है। मेरी सांसे अटकी रहती हैं उन्होंने मजाकिया दृष्टि से यह भी कहा मुझे चिंता लगी रहती है की लैंड करते वक्त हवाई जहाज के पहिए खुले कि नहीं जिसे सुन श्रोताओं में हंसी ठहाके गूंज पड़े।

राजन महाराज ने कथा प्रेमियों को बताया यह रामचरितमानस की कथा उसी सरोवर की भांति है जिस प्रकार जंगल में आग लगने के बाद कोई हाथी सरोवर की ओर दौड़ता हुआ जाता है और उस सरोवर के बीचों बीच बैठकर अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है और खुद में यह एहसास करता है कि जब तक मैं सरोवर के बीचों बीच बैठा हूं जंगल की आग से मेरा बाल भी बांका नहीं हो सकता।

कथा में आगे महाराज ने कहा कि जिस प्रकार सरोवर में नहा कर आदमी शरीर के मैल को साफ करता है उसी प्रकार रामचरितमानस रूपी सरोवर में डुबकी लगाकर अपने पापों से मुक्ति पा लेता है तथा अंदर की मेल भी साफ हो जाते हैं। हालांकि आज रामकथा के आरंभ में राम के जन्म का कोई विशेष प्रसंग नहीं आया किंतु रामचरितमानस की रचना व उससे पूर्व महर्षि वाल्मीकि द्वारा किस प्रकार रामायण लिखा गया उन्होंने बताया ।रामचरितमानस से पूर्व किस प्रकार बाल्मीकि ने राम जन्म से पूर्व उसकी रचना की रामायण समाप्त होने के बाद हनुमान जी ने आंखों देखा किस प्रकार रामायण की रचना की और उसे महर्षि बाल्मीकि द्वारा समुद्र में विसर्जित करवा देने के बाद प्रभु राम द्वारा मिले वर से हनुमान जी द्वारा रचित रामायण ही कलयुग में तुलसीदास जी द्वारा रामचरितमानस के नाम से प्रसिद्ध हुआ जो की संस्कृत में लिखे गए बाल्मीकि रामायण की अपेक्षा अधिक प्रचलित व लोकप्रिय हो गया।

राम कथा आरंभ होने से पूर्व नगर में कलश व ध्वजा यात्रा निकाल नगर के विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए पुनः पंडाल जहां कथा आरम्भ होना था कलश स्थापित कर पहले दिन के कथा का आरंभ जो कि सायं 4:00 बजे से होना तय था कुछ समय पश्चात सायं सूर्यास्त के उपरांत आरंभ हुआ जिसके बाद श्री राम की पूजन अर्चना किया गया जिसमें नगर पंचायत पिपरी अध्यक्ष उनके माता पिता व समाजसेवी तथा प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहे।

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