मध्य प्रदेश में सीएम कमलनाथ और सिंधिया के बीच मतभेद सामने आया

क्या मध्य प्रदेश कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है? क्या मध्य प्रदेश कांग्रेस में फिर हावी है गुटबाजी? क्या सिंधिया और कमलनाथ के बीच कुछ मतभेद चल रहे हैं? ये सवाल शनिवार को मुख्यमंत्री कमलनाथ के एक बयान के बाद एक बार फिर खड़ा हो गया है ।

दरअसल, मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार 15 सालों के वनवास के बाद बड़ी मुश्किल से बन पाई है । हालांकि, कांग्रेस को चुनाव में पूर्ण बहुमत नहीं मिला था । लेकिन सपा, बसपा और निर्दलीयों के समर्थन से कांग्रेस ने सरकार बना ली थी और वरिष्ठ नेता कमलनाथ को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री भी बना दिया गया थी । इसके बाद से ही लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया अलग-अलग मुद्दों को लेकर कमलनाथ सरकार पर हमला करते रहते हैं ।

हाल ही में सिंधिया ने टीकमगढ़ की एक सभा में अतिथि शिक्षकों से कहा था कि हमारी सरकार यदि वचनपत्र में दिए वचनों को पूरा नहीं करेगी तो वो अतिथि शिक्षकों के साथ सड़क पर उतरेंगे। शनिवार को पत्रकारों ने जब मुख्यमंत्री कमलनाथ से इस पर प्रतिक्रिया लेनी चाही तो कमलनाथ ने गुस्से में दो टूक जवाब देते हुए कहा कि ‘तो वो उतर जाएं’।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान कमलनाथ ने कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से राज्य सरकार पर किए गए ताजा हमले को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी।

दरअसल, हाल ही में टीकमगढ़ जिले में एक सभा के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था, ‘अतिथि शिक्षकों को मैं कहना चाहता हूं । आपकी मांग मैंने चुनाव के पहले भी सुनी थी । मैंने आपकी आवाज उठाई थी और ये विश्वास मैं आपको दिलाना चाहता हूं कि आपकी मांग जो हमारी सरकार के घोषणापत्र में अंकित है वो घोषणापत्र हमारे लिए हमारा ग्रंथ है ।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अतिथि शिक्षकों को सब्र रखने की सलाह देते हुए कहा, अगर उस घोषणापत्र का एक-एक अंश पूरा न हुआ तो अपने को सड़क पर अकेले मत समझना । आपके साथ सड़क पर ज्योतिरादित्य सिंधिया भी उतरेगा । सरकार अभी बनी है, एक साल हुआ है। थोड़ा सब्र हमारे शिक्षकों को रखना होगा । बारी हमारी आएगी, ये विश्वास मैं आपको दिलाता हूं और अगर बारी न आए तो चिंता मत करो, आपकी ढाल भी मैं बनूंगा और आपका तलवार भी मैं बनूंगा ।

दरअसल, सिंधिया पहले भी कई बार अपने तेवर दिखा चुके हैं। बात भले ही पूरी कर्जमाफी ना होने की हो या बाढ़ राहत सर्वे और उसकी राशि मिलने में हो रही देरी की हो, सिंधिया ने सार्वजनिक रूप से सरकार के कामकाज पर उंगली खड़ी की थी। वहीं माना जाता है कि विधानसभा चुनाव में जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने धुंआधार प्रचार किया तब माना जा रहा था कि सरकार बनने पर कांग्रेस सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ । तब से ही माना जा रहा है कि सिंधिया अपनी अनदेखी से नाराज हैं ।


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