श्रीमद् भगवद् गीता भास्य यथार्थ गीता पाठ का नौ दिन का आयोजन

जनपद न्यूज ब्यूरो

शाहगंज । स्थानीय पत्रकार विवेकानंद के यहां श्रीपरमहंस आश्रम स्वामी अङगङानंद जी कृत श्रीमद् भगवद् गीता भास्य यथार्थ गीता पाठ का नौ दिन का आयोजन किया गया है जिसमें पूज्य श्री ने बताया कि जिस समय साधक की बुध्दि मोह रूपी दलदल को पार कर लेगी उस समय जो सुनने योग्य है उसे सुन सकेगा और सुने हुए के अनुसार आचरण कर पायेगा आगे इन्द्रियों को वश में करने के लिए समर्पण के साथ इष्ट चिन्तन को अनिवार्य बताया ऐसा न करने पर विषयों का चिन्तन होने लगता है और उसमें आसक्ति हो जाती हैं आसक्ति से कामना और कामना की पूर्ति न होने से क्रोध से अविवेक का जन्म होता है और अविवेक से स्मृति भ्रम और स्मृति भ्रम से बुध्दि नष्ट हो जाती है और साधक साधना पद से च्युत हो जाता है जैसे जल में नाव को वायु हरण करके गन्तव्य से दूर कर देता है ठीक उसी तरह विषयों में विचरण करती हुई इन्द्रियों में जिस इन्द्रिय के साथ मन रहता है वह इन्द्रिय उस अयुक्त साधक की बुद्धि हर लेती है इसलिए प्रकृति में जहाँ भी मन जाए वहां से खींचकर इष्ट में लगाना चाहिए केवल साधन करके ही इस स्थिति को पाया जा सकता है जिसमें मोह सबसे बड़ा बाधक है सत्संग में गंगा केशरी विजय शर्मा अशोक शर्मा फौजदार पाल सुनील पांडेय आदि लोग श्रवण कर अनुसरण करते हुए सक्तेसगढ आश्रम जाकर लाभान्वित हो रहे हैं


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