फिल्म ‘Shikara’ की समीक्षा


कश्मीर के हालातों के बारे में आखिर किसे नहीं पता. आपको, मुझे, हम सभी को पता है कि कश्मीर शुरू से ही मुश्किलों में फंसा रहा है. आतंकी हमला, लोगों पर अत्याचार, कर्फ्यू, सुविधाओं का ना मिलना, इंटरनेट बंद होना और जाने कितनी दिक्कतें कश्मीर में रहने वाले लोगों को होती है. उस शहर के लोग ना जाने कब से क्या-क्या सह रहे हैं. उन्हीं तमाम लोगों में आते हैं कश्मीरी पंडित, जिन्हें अपने ही देश में रिफ्यूजी की तरह रहना पड़ रहा है.

डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म शिकारा उसी दर्द को एक प्रेम कहानी के माध्यम से बताती है. ये कहानी है शिव कुमार धर और उसकी पत्नी शांति धर की, जो पंडित हैं और कश्मीर में शांत और खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं. ये समय 80s के अंत का है जहां घाटी में धीरे-धीरे सांप्रदायिक तनाव अपने पैर पसार रहा है. शिव और शांति को अपनी जिंदगी, अपनी जीवनभर की कमाई से बनाया घर और सुख को छोड़कर अपनी जान के लिए भागना पड़ेगा एक ऐसी जगह जो उनकी नहीं है.

फिल्म में परफॉरमेंस:
फिल्म शिकारा से एक्टर आदिल खान (शिव) और सादिया (शांति) ने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया है. इन दोनों का काम बहुत अच्छा है. शिव कुमार धर के किरदार में आदिल खान ने जान डाली है. शिव एक टीचर है जो श्रीनगर के अमर सिंह कॉलेज में बच्चों को पढ़ाते हैं. उनका अपने आसपास होती चीजों को देख सहम जाना, उनके आंसू, उनकी खुशी और शांति के उनका प्यार आपके दिल तक पहुंचता है.

शांति के रोल में सादिया ने भी बढ़िया काम किया है. सपनों के घर से निकलकर रिफ्यूजी कैंप में रहना, डर कर भी उम्मीद ना छोड़ना और शिव को हरदम संभालना शांति सबकुछ हंसकर कर लेती है. सादिया के आंसू, उनका भोलापन, दर्द और खुशी आपको अंदर तक हिलाते हैं. आदिल और सादिया की केमिस्ट्री और रोमांस बहुत खूबसूरत है. जम्मू के मुठी कैंप में रहने वाली इस जोड़ी से आपको प्यार हो जाएगा.

फिल्म में डायरेक्टर:
इस फिल्म को देखकर ऐसा लगता है कि डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा, अभिजात जोशी और राहुल पंडिता ने कश्मीरी पंडितों के दर्द को प्यार में घोलकर बनाई स्याही से लिखा है. एक प्रेम कहानी जो वक्त, नफरत और लड़ाई के सामने टिकी रही और कालजयी हो गई. विधु ने शिव और शांति का प्यार और रोमांस तो हमें दिखाया ही साथ ही कश्मीर का वो चेहरा भी दिखाया, जो हमने शायद खबरों में ही सुना है.

कश्मीर में पंडितों के घरों को जलाना, रातोरात लोगों का अपने घर छोड़ना, सड़क पर गोलियों का बरसना और लोगों का अपनी जान गंवाना. ये सब विधु ने अपनी इस फिल्म में दिखाया है, जिसे देखकर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे. ये फिल्म आपको दिखाती है कि कैसे अपने वतन को छोड़ना एक इंसान के लिए मुश्किल होता है. कैसे आपके दिन और साल बदलते हैं लेकिन पुरानी यादें और पुरानी बातें आपको बार-बार आकर कचोटती हैं.

कैसे इंसान की तमाम कोशिशें नाकाम होती हैं और रातोंरात उसकी जिंदगी पलटती है. लेकिन प्यार… प्यार हमेशा आपके साथ रहता है. आपका साथ देने के लिए, दर्द बांटने के लिए आपको संभालने के लिए और खुद संभलने के लिए.

इस फिल्म के जरिए विधु विनोद चोपड़ा उन 4 लाख कश्मीरी पंडितों की दर्दनाक कहानी बताते हैं, जो अपने वतन में गैरों की तरह रह रहे हैं.

ए आर रहमान और कुतुब-ए-कृपा का कंपोज किया बैकग्राउंड स्कोर खूबसूरत है. फिल्म के गानों को इरशाद कामिल ने लिखा है जो बहुत बढ़िया हैं. सिंगर पापोन की आवाज में ‘ऐ वादी शहजादी’ सुनकर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे. शिकारा की कहानी के साथ-साथ इसकी सिनेमेटोग्राफी भी खूबसूरत है. सिनेमेटोग्राफर रंगराजन रामभद्रन आपको कश्मीर और जम्मू के रिफ्यूजी कैंप्स को देखने का एक अलग नजरिया देता है.


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