अंधविश्वास के कारण,हर साल मरते आम के सैकड़ों पेड़

एस के (संवाददाता)

*गांव में पीलिया से बचाने के लिए आम के छाल से नहलाते हैं

सागोबांध। ग्रामीण व आदिवासी अंचलों में आम का पेड़ विलुप्त होता दिखाई दे रहा है। आजकल पर्यावरण प्रदूषण के कारण फलदार वृक्ष नहीं उग पा रहे हैं। कारण यह कि वर्तमान समय में पर्यावरण में प्रदूषण की तीव्र मात्रा है वही दूसरी ओर मृदा भी बीमार है। पेड़ लगाए जा रहे हैं तो वह कई रोगों से ग्रसित हो जा रहे हैं और उनका वृद्धि रुक सा जा रहा है। बहुत मेहनत व निगरानी से कुछ फलदार वृक्ष आम, महुआ,अमरूद उगे भी हैं तो ग्रामीण आदिवासी अंचलों में जागरूकता व अशिक्षा के कारण जब लोगों में पीलिया बीमारी हो जा रहा है तो उसे चिकित्सकीय इलाज कराने के बजाय अंधविश्वास के कारण आम के पेड़ के छाल को निर्द यी पूर्वक छीलकर उससे नहलाते हैं। उनका मानना है कि इससे बीमारी ठीक हो जाता है। अगर देखा जाए तो ग्रामीण एरिया में आम का पेड़ विलुप्त होता जा रहा है जिसका शतप्रतिशत कारण आम के छाल का निकालना है।

अगर लोगों में जागरूकता नहीं आई और इसी तरह छाल निकालते रहेंगे तो एक भी आम का पेड़ गांव में दिखाई नहीं देगा। आम के विशालकाय पेड़ दिन रात सूखते जा रहे हैं और इससे गांव के लोग बेपरवाह हैं। गांव के लोग चोरी चुपके रात विरात जाकर पेड़ के छाल को छील लेते हैं और पेड़ का मालिक ऐसा करने वाले खोजता ही रह जाता है। एक जमाना था कि गांव से फल बिकने हेतु शहरों में आते थे और आज आलम यह है कि गांव में लोग आम का अचार लगाने के लिए फल को खोजते फिरते हैं। आज से दो दशक पहले गांव के सभी लोगों के पास आम का कम से कम दो पेड़ रहा करता था परंतु आज पूरे गांव में 10 पेड़ देखने को मिलते हैं। गांव के लोगों ने पर्यावरण संगरक्षकों व सरकार का इस इस और ध्यान आकृष्ट कराया है और मांग किया है कि लोगों में जन जागरूकता लाने का प्रयास करें जिससे गांव में आम के पेड़ का अस्तित्व रह सके और विलुप्त होने से बच जाए।

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