मोहम्मद साहब के आदर्शों पर मुसलमान चलता तो आज मुल्क का हालात यह नहीं होता- अजीज ए मिल्लत

रमेश यादव ( संवाददाता )

हाफिज मसूद रजा के अरबी में स्नातकोत्तर की डिग्री मिलने पर मुनक्कीद हुआ महफिले मिलाद हजरत के साहबजादे का अरबी में पीएचडी की मिस्र यूनिवर्सिटी से डिग्री लेना सपना

दुद्धी।अल्लाह के सबसे प्यारे महबूब और दुनियां को अमन व शांति का पैगाम देने वाले हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के बताए रास्ते पर अगर आज मुसलमान चलता तो मुल्क का यह हालात कत्तई नहीं होता। आपस की नाइत्तेफाकी इसकी खास वजह है। उक्त बातें अल जामीअतुल अशरफिया मुबारकपुर के सरवराहे आला हुजूर अजीज-ए-मिल्लत अब्दुल हफीज साहब ने शनिवार को दुद्धी स्थित हजरत के दौलत कदे पर आयोजित महफिल ए मिलाद के कार्यक्रम में उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए अपने रूहानी तकरीर में कहीं। उन्होंने कहा कि हमारे नबी का यह फरमान था अपने खाने से पहले पड़ोसी को पूछा करो कि वह खाना खाया या नहीं। पड़ोसी चाहे किसी मजहब का हो। मगर मुसलमान इस नेक काम से अछूता रह गाफिल हो गया।इन परिस्थितियों में अगर आज हिंदू मुस्लिम एकता में कटुता आई है तो इसकी बड़ी वजह लोगों के बीच की दूरी भी है। हम अपने आप में सांसारिक सुख में पड़ोसियों की खोज खबर लेना भूल गए, जिससे दूरियां बढ़ती गई और आज यह नौबत आ गई कि देश में जगह-जगह कटुता देखने को मिल रही है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दारुल उलूम कादरिया नूरिया के अरबी महाविद्यालय के प्राचार्य मुफ्ती महमूद साहब और अल जमीअतुल अशरफिया मुबारकपुर से फजीलत की डिग्री हासिल करने वाले मोहम्मद मसूद रजा को अपना खलीफा बनाते हुए खिलाफतो एजाजात अता किया। इसके तहत अब इन दोनों शख्सियतों को मुरीद करने (गुरमुख करने) के साथ-साथ ताबीज वगैरह लिखने का अख्तियार होगा। इस अवसर पर कारी उस्मान साहब ने रूहानी नात पेश की। मोहम्मद मसउद रजा ने शिरकत करने वाले लोगों के प्रति शुक्रिया अदा करते हुए बताया कि फजीलत यानी स्नातकोत्तर की डिग्री अल जामिया तुल अशरफिया मुबारकपुर यूनिवर्सिटी से मैंने इसी साल हासिल किया है। अक्टूबर माह में जामे अजहर मिस्र यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की डिग्री रसूले हदीस से पीएचडी करने का प्रोग्राम बनाया हूं। अगर एडमिशन नहीं मिला तो मुबारकपुर यूनिवर्सिटी से ही जहां हदीस, इस्लामी फिक्र और अरबी लिटरेचर पर पीएचडी की उपाधि प्रदान की जाती है। मैं इस्लामिक फिक्र नामक विषय पर पीएचडी करूंगा। हुजूर नसीर ए मिल्लत ने अपने साहबजादे की दीनी तालीम और कामयाबी पर खुशी जाहिर करते हुए अल्लाहपाक के दरबार मे शुक्रिया अदा किया वहीं कार्यक्रम में मुबारकपुर से चलकर बतौर मेहमाने खुशुशी हुज़ूर अजीजे मिल्लत सहित बतौर मेहमाने खास कस्बा सहित जनपद के कोने-कोने, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार व मध्यप्रदेश से आने वाले मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। इस अवसर पर मौलाना एजाज अंजुम झारखंड, मौलाना हिफाजत हुसैन रावर्ट्सगंज, दारुल उलूम कादरिया नूरिया बघाडू के हाफिज अब्दुल रज्जाक, मौलाना महमूद, भदोही के मु.अरशद, मु.आरिफ, चोपन ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि उस्मान भाई, रेणुकूट के हाजी फकीर अली, हाजी ऐनुलहक, हाजी असगर अली, मौलाना नजीरुल कादरी, हाफिज तौहीद, पेशिमाम सईद अनवर, मौलाना गुलाम सरवर, सपा नेता जुबेर आलम, जामा मस्जिद के सदर मोहम्मद शमीम अंसारी, कलीमुल्लाह खान, एजाजुल हुदा, प्रबंधक हसनैन अंसारी, सुंदरी के पूर्व प्रधान सादिक हुसैन आदि सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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