आयो बसंत-ॠतुराज के आहट से ही निराली हो जाती है प्रकृति

धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)

विंढमगंज। ऋतुओं के राजा बसन्त के आहट से ही प्रकृति निराली हो जाती है।प्रकृति में निहित हरे पेड़ पौधे ,फूल सभी मदमस्त श्रींगार करने लगती हैं।लगातार सर्दी के बाद फूलों का खिलना,पेड़ों में नये पत्तों का आगमन,नदियों की कलकल,पक्षियों का कलरव, प्रकृति को और मनमोहक बनाती हैं जिससे जड़ चेतन में कलात्मक गुणों का समावेश होता है।सर्द ऋतु की लम्बी ख़ामोशी के बाद पूरी प्रकृति स्वयं को पूरी तरह चादर से ढक लेती है।सरसों के खेत पीले- पीले फूलों से खिल उठती है।आम के पेड़ों में बौर तथा चम्पा,चमेली,गुलाब,गेंदा के अपने यौवन के उफान पर हो जाती है।

-बसन्त ऋतु का पौराणिक महत्व। पौराणिक कथाओं में भी बसन्त ऋतु के महत्व हैं।एक कथा के अनुसार रूप एवं सौंदर्य के देवता, कामदेव के घर पुत्र प्राप्ति का समाचार सुन प्रकृति झूम उठती है।पेड़ों के नव पल्लव नवजात हेतु पालना बनाती है।फूलों द्वारा वस्त्र तथा कोयल मधुर गीत सुनाती हैं।


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