“अव्यक्त दिवस” के रूप में मनाया गया ब्रह्मा बाबा की पुण्य तिथि

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । यह सृष्टि संकल्पों का कर्म जगत में विस्तार हैं। सतो, रजो और तमो दृष्टि, वृति और कृति के अनुसार इस सृष्टि पर सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग चार कालखण्ड होता है, जिसमें मनुष्य और प्रकृति की अवस्था और व्यवस्था कालखण्ड खण्ड के सापेक्ष होती है, इसलिए कहा जाता है कि यह सृष्टि की ब्रह्मा ने अपने संकल्पों से रचना की है। इस पौराणिक मान्यता की सन 1937 में पुनरावृति हुई जब ज्योतिबिन्दुस्वरूप परमात्मा शिव के दिव्य साक्षात्कार के फलस्वरुप परमात्मा के साकार माध्यम बने पिता श्री ब्रह्मा बाबा ने इस सृष्टि पर आदि सनातन दैवी संस्कृति की पुनर्स्थापना के लिए ओम मण्डली के नाम से एक आध्यात्मिक संकल्प क्रांति का प्रारम्भ किया। पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने अपनी महान संकल्प को साकार करने के लिए अपनी सम्पूर्ण चल-अचल सम्पत्ति समर्पित करने के बाद चौदह वर्ष तक संस्कारो और संकल्पो के दिव्यीकरन के लिए 400 ब्रह्मा वत्सो के साथ तपस्या प्रारम्भ किया। साठ वर्ष की अवस्था में उन्हें इस कलियुगी दुनिया के विनाश और आने वाली सतयुगी दुनिया के पुनर्स्थापना का साक्षात्कार हुआ था। ब्रह्मा बाबा एक प्रयोगधर्मी आध्यात्मिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने नारीयों में छिपी हुई सृष्टि के सृजन और पालना की शक्ति को पहचानकर उन्हें इस महान कार्य के निमित्त बनाया। वर्तमान समय मे पिताश्री ब्रह्मा बाबा द्वारा नई सतयुगी दुनिया की पुनर्स्थापना का कार्य 104 वर्षीया दादी जानकी के मार्गदर्शन में विश्व के 140 देशों में 9000 से अधिक सेवाकेन्द्रों के माध्यम से चल रहा है।अपने तपस्या के बल पर 18 जनवरी 1969 को पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने आध्यात्मिक सम्पूर्णता की सर्वोच्च अवस्था फरिश्ता स्वरूप को प्राप्त किया था। आज भी वे सूक्ष्मरूप से मनुष्यत्माओं का मार्गदर्शन कर रहे है।

पिताश्री ब्रह्मा बाबा की पुण्य तिथि को “अव्यक्त दिवस” के रूप में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के विकास नगर स्थित सेवा केंद्र पर सेवाकेंद्र प्रभारी बी0के0सुमन के नेतृत्व में मनाया गया। इस अवसर पर विश्व शांति और सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के लिए 14 घंटे का अखण्ड योगभट्टी का कार्यक्रम रखा गया। जनपद के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए तथा अपनी सूक्ष्म मानवीय कमजोरियों का त्याग करने का दृढ़ संकल्प किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में बी0के0प्रतिभा, बी0के0सरोज, बी0के0सीता, बी0के0कविता ने सक्रिय योगदान दिया। इसके अतिरिक्त यह कार्यक्रम ओबरा और रेनुकूट स्थित उपसेवा केन्द्र पर भी उत्साहपूर्वक मनाया गया।


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