चोपन नगर पंचायत उप चुनाव : ताज किसके सिर, फैसला कल, दोनों के समर्थक कर रहे जीत का दावा

घनश्याम पांडेय (संवाददाता)

चोपन । चोपन नगर पंचायत का चुनाव मंगलवार को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो गया । चुनाव को ठीक से सम्पन्न कराने के लिए प्रशासन लगातार अपनी निगाह बनाये हुए था । जिले के आलाधिकारी से लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन हर बूथ पर चक्रमण करते नजर आए । हालांकि रेनुकूट की अपेक्षा चोपन में मतदान प्रतिशत काफी कम था। मकर संक्रांति त्योहार व खराब मौसम के कारण कुछ मतदान केंद्रों पर भीड़ कम दिखी। चोपन बैरियर पर बने मतदान केंद्र पर भीड़ अच्छी नजर आयी । सुबह से लेकर शाम तक लोगों का तांता लगा रहा । कुछ बाहरी लोगों के मत डालने की सूचना पर कई प्रत्याशियों ने आपत्ति दर्ज कराई ।

यदि चुनाव समीक्षा की बात करें तो इस बार लड़ाई बेहद दिलचस्प दिखा । टक्कर भाजपा के सत्यप्रकाश तिवारी व चेयरमैन स्व0 इम्तियाज अहमद की पत्नी फरीदा बेगम के बीच है । भाजपा नेताओं ने इस बार अपनी पूरी ताकत झोंक दी है । विधायक से लेकर अन्य सभी पदाधिकारी चोपन में कैम्प कर न सिर्फ स्थिति पर नजर बनाए हुए थे बल्कि घर-घर जाकर प्रचार भी किया ।

आपको बता दें कि चुनाव तिथि घोषणा के बाद से भाजपा में प्रत्याशी के दावेदारी को लेकर बर्चस्व दिखा और अंत में सत्य प्रकाश तिवारी के नाम पर सहमति बनी । उसके बाद भाजपा को पार्टी के भीतर अंतर्कलह को खत्म करने की बड़ी चुनौती थी । जिसे जिले के पदाधिकारियों ने बैठकर खत्म किया । क्योंकि पिछली बार यही अंतर्कलह ही हार का कारण बनी थी, जब चुनाव स्व0 इम्तियाज अहमद ने जीत लिया था ।

इस बार स्व0 इम्तियाज अहमद की पत्नी चुनाव मैदान में उतरी तो लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला और लोग भावनात्मक रूप से जुड़े । स्व0 इम्तियाज अहमद के बेटों ने भी घर से निकलकर वोट मांगा और लोगों को समझाने में काफी सफल रहे । मगर इसी बीच उनको झटका तब लगा जब उनके कुछ बेहद करीबी उनके साथ न होकर बीजेपी के खेमे में चले गए । जिससे बीजेपी को फायदा मिला । हालांकि इस बार उस्मान के नेतृत्व में चुनाव जरूर लड़ा गया मगर राजनीतिक दांव पेंच की समझ कम होने की वजह से एकजुटता की कमी भी दिखी ।
यह जरूर है कि बीजेपी प्रत्याशी के समर्थक मतदान खत्म होते ही जीत का दावा ठोकने लगे लगे लेकिन मतदाताओं की खामोशी और कम मतदान को लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा । टीम ने कई लोगों से बातचीत की तो यह भी सामने आया कि बड़े परिवार में सदस्यों ने दोनों को वोट देकर सम्मान को रखा ।
हां इतना जरूर है कि इस बार चुनाव में स्व0 इम्तियाज अहमद की कमी न सिर्फ परिवार वालों को खली, बल्कि बीजेपी नेता भी मान रहे थे कि यदि इम्तियाज अहमद रहते तो शायद लड़ाई लड़ना और भी कठिन हो जाता ।

बहरहाल दोनों प्रत्याशियों की धड़कने तेज हैं मगर दोनों के समर्थक जीत का दावा कर रहे हैं । अब देखने वाली बात यह होगी कि इस बात जनता जनार्दन ताज किसके सिर पहनाती है ।


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