देश मुश्किल में है, हमारे कुछ युवा सड़कों पर उतरे हुए हैं जबकि उन्हें अपनी कक्षाओं में होना चाहिए- गावस्कर

महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने जुलाई में विश्व कप सेमीफाइनल में भारत की हार के बाद से खेल से महेंद्र सिंह धोनी के ब्रेक पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कोई स्वयं को इतने लंबे समय तक भारत की ओर से खेलने से दूर रख सकता है? उन्होंने देश भर में हुए हालिया प्रदर्शनों को लेकर भी अपनी चिंता जताई।

पिछले कुछ हफ्तों में देश भर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है । संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ सबसे पहले जामिया मिलिया विश्व विद्यालय में विरोध देखने को मिला जबकि जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय (जेएनयू) में नकाबपोश लोगों ने हिंसा फैलाई।

गावस्कर ने 26वें लाल बहादुर शास्त्री स्मृति व्याख्यान के दौरान कहा, ‘‘देश मुश्किल में है । हमारे कुछ युवा सड़कों पर उतरे हुए हैं जबकि उन्हें अपनी कक्षाओं में होना चाहिए । सड़कों पर उतरने के लिए उनमें से कुछ को अस्पताल जाना पड़ा ।

उन्होंने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर कक्षाओं में हैं, अपना भविष्य बनाने और भारत को आगे ले जाने का प्रयास कर रहे हैं । एक देश के रूप में हम तभी आगे बढ़ सकते हैं जब हम सभी एकजुट हों । जब हम सभी सामान्य भारतीय होंगे । खेल ने हमें यही सिखाया है । गावस्कर ने उम्मीद जताई की जल्द ही सबकुछ ठीक हो जाएगा ।

नौ जुलाई को विश्व कप सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की हार के बाद से धोनी के भविष्य को लेकर अटकलों का दौर जारी है । 38 साल के धोनी ने इस हार के बाद से क्रिकेट नहीं खेला है लेकिन उनके आईपीएल में वापसी करने की उम्मीद है।

यह पूछने पर कि क्या धोनी भारत की टी20 विश्व कप टीम में जगह बना सकते हैं, गावस्कर ने कहा, ‘‘फिटनेस ऐसी चीज है जिसके बारे में मैं आपको कुछ नहीं बता सकता. यह सवाल स्वयं धोनी से पूछा जाना चाहिए । उसने 10 जुलाई से खुद को भारत की ओर से खेलने के लिए उपलब्ध नहीं रखा है ।

महान बल्लेबाज और पूर्व भारतीय कप्तान गावस्कर ने लाल बहादुर शास्त्री स्मृति व्याख्यान के बाद कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण सवाल है। क्या कोई भारत के लिए खेलने से खुद को इतने समय तक दूर रख सकता है? यह सवाल है और इसी के अंदर जवाब है।’’ गावस्कर ने साथ ही कहा कि देश के शीर्ष प्रथम श्रेणी क्रिकेट टूर्नामेंट रणजी ट्राफी में जब तक खिलाड़ियों की मैच फीस में भारी भरकम इजाफा नहीं किया जाता तब तक यह लुभावनी इंडियन प्रीमियर लीग की बराबरी नहीं कर सकती ।

रणजी ट्राफी खेलने के लिए एक खिलाड़ी को प्रति मैच लगभग ढाई लाख रुपये मिलते हैं लेकिन कुछ समय पहले तक खिलाड़ियों को काफी कम मैच फीस मिलती थी । इस इजाफे के बावजूद इस प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट से खिलाड़ियों को होने वाली कमाई मामूली है. गावस्कर ने कहा, ‘‘रणजी ट्राफी पर आईपीएल का दबदबा रहता है । जब तक कि मैच फीस में बड़ा इजाफा नहीं किया जाता तब इसे अनाथ और भारतीय क्रिकेट का रिश्ते का गरीब भाई ही माना जाएगा ।


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