कल होने वाले संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत एवं महात्म्य.

डॉ शशि कुमार पाठक, पीएचडी (विद्यावारिधि 9473616488)

माघ कृष्ण पक्ष तृतीय युक्त चतुर्थी को यह व्रत मनाया जाता है। इस वर्ष 13 जनवरी दिन सोमवार को तृतीया तिथि रात्रि 8:06 तक है, इसके बाद चतुर्थी तिथि हो जा रही है, चंद्रोदय रात्रि 8:14 मिनट पर है। अतः कल ही चतुर्थी तिथि मनाई जाएगी। लोक परंपरा में गणेश चौथ के नाम से प्रचलित संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत का महात्म्य कल ही है। पंचांग में दिए गए समय के अनुसार अर्घ देकर विधिवत गणेश की पूजा अर्चना की जाएगी। ऐसा माना जाता है कि कल के दिन गणेश की उत्पत्ति हुई थी। इसे तिल कुटी और वक्रतुंड चतुर्थी भी कहते हैं।सभी प्रकार के कष्टों का निवारण तथा कामनाओं की पूर्ति इस व्रत से होती है। शास्त्रीय विधि के अनुसार इस व्रत को विशेषकर महिलाएं करने वाली अपनी संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। यह व्रत निर्जला रखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विधि विधान सहित पूजा होती है। प्रसाद के रूप में विशेष तिल और गुड़ का अर्पण होना चाहिए और चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। पुराणों में ऐसा वर्णन मिलता है, कि एक बार देवताओं के सामने विपत्ति दिखी, सभी देवता मिलकर के भगवान शिव के पास गए। उनके पास शिव परिवार गणेश कार्तिकेय बैठे हुए थे। देवताओं ने अपनी विपत्ति महादेव से कहे। देवताओं की बात सुनकर शिव ने दोनों पुत्रों से कहा कि, देवताओं की समस्या का समाधान कौन करेगा। दोनों ने अपनी सहमत जताई अपने- अपने को सक्षम बताएं। तब भगवान शिव ने दोनों की परीक्षा के लिए कहा कि जो पहले पृथ्वी का परिक्रमा लगाएगा वही देवताओं की मदद कर सकता है। इतनी बात सुनकर कार्तिकेय ने अपने वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकले। गणेश जी बुद्धि के देवता माने जाते हैं उन्होंने तुरंत एक उपाय सूझा और वे उठकर माता पिता कि सात परिक्रमा किए। यह जानकर शिव ने पूछा कि हे गणेश तूने यह क्या किया तब गणेश ने कहा कि माता के चरणों में समस्त लोक है, इसलिए मैं आप लोगों की परिक्रमा किया।ऐसी बात सुनकर के शिव ने गणेश को आशिर्वाद दिया कि चतुर्थी के दिन जो तुम्हारा पूजन करेगा तथा रात्रि में चंद्रोदय के समय अर्घ देगा, उसके तीनों ताप दूर होंगे और भौतिक सुखों की प्राप्ति होगी। पुत्र पौत्रादि की, कभी धन की कमी नहीं रहेगी। वैसे तो अन्यान्य ग्रंथों में गणेश की उत्पत्ति के बारे में भी दृष्टांत आज के दिन मिलता है। किसी कारणवश व्यक्ति इस व्रत में असमर्थ दिख रहा है तो कम से कम गणेश जी का विधि विधान सहित पूजन करें, इससे भी धन ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। एकदंताय विद्महे, वक्रतुंडाय धीमहि, तन्नो बुद्धि प्रचोदयात। ।


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