ग्राम पंचायत निधि से कराया जाय विद्यालयों का कायाकल्प : डीएम

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । “हकीकत में तालीम अनमोल है, शिक्षा प्राप्त करने से खुद इन्सान के बहुत सारे मामले सुलझ जाते हैं, शिक्षा से समाज के चतुर्दिक विकास के सभी रास्ते खुले रहते है, शिक्षा के बिना विकसित व अच्छे समाज की कल्पना कभी नही की जा सकती। “सोन स्कूल कायाकल्प-स्कूल का संकल्प” को पूरा करने यानी सोनभद्र जिले को अति पिछड़े की श्रेणी से बाहर लाने के लिए स्कूल कायाकल्प के कार्यों को बोझ न समझकर परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले जिले के सामान्य व गरीब बच्चों के बेहतर भविष्य यानी कि जिले के बेहतर भविष्य को बनाने के मद्देनजर परोपकार की भावना से नोडल अधिकारी व स्कूलों से जुड़े तकनीकी अधिकारी सौंपे जा रहे कार्यों को निभायें।”
उक्त बातें जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम व मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित स्कूल कायाकल्प से जुड़े जिले के नोडल अधिकारियों, तकनीकी अधिकारियों के साथ ही अन्य सम्बन्धित को दायित्वबोध कराते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि सोनभद्र जिले के परिषदीय स्कूलों में जरूरत के मुताबिक कार्यों को पूरा कराने के लिए ग्राम पंचायत निधि में पड़े हुए 1अरब10करोड़ की धनराशि का इस्तेमाल करने के साथ ही मनरेगा से भी कार्य कराये जायें। स्कूलों के कायाकल्प का मूल दायित्व बेसिक शिक्षा विभाग का है, अन्य विभागों के सहयोगी अधिकारी परोपकार की भावना से स्कूलों का कायाकल्प कराकर अपने कर्तव्य निष्ठा का परिचय दें।प्रशिक्षण में नोडल अधिकारियों, तकनीकी अधिकारियों व अन्य विभागों के अधिकारियों का दायित्वबोध करते हुए कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार परिषदीय स्कूलों में बेहतर से बेहतर सुविधा मुहैया कराकर अब सरकारी स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों क तरह अच्छे माहौल में गरीब बच्चों को तालीम देने की सहूलियत मुहैया करायी जाय। उन्हेंने कहा कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खण्ड शिक्षा अधिकरी व स्कूलों के अध्यापकों के माध्यम से स्थानीय स्कूलों के अभिभावकों यानी सामुदायिक सहयोग प्राप्त करते हुए 16 जनवरी 2020 से स्कूलों में कायाकल्प का कार्य शुरू करा दें। उन्होंने कहा कि जरूरत है लोगों को प्रेरित करके दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ परिषदीय स्कूलों को मानक के अनुरूप सभी जरूरतों को पूरा करने की। उन्होंने कहा कि स्कूल परिसर के अन्दर कायाकल्प के तहत समरसेबिल लगाकर रनिंग वाटर, बाल्टी व मग, बालक व बालिका मुत्रालय, हैण्डवासिंग की व्यवस्था, खिड़की दरवाजे, रौशनदान, स्टोरेज, बाल चित्रकारी, रसोईयां घर,जल निकास, स्वच्छ शौचालय, स्कूल परिसर में स्थापित आंगनबाड़ी केन्द्र के साथ ही स्कूल परिसर के पानी का निकास, स्कूल का गेट व बाउण्ड्रीवाल के अलावा स्कूल परिसर के जीर्ण-शीर्ण दीवाल की रंगाई-पोताई के साथ ही दीवाल के टूटे-फूटे फर्श को भी ठीक किया जाय। उन्होंने बीएसए को निर्देशित किया कि ग्राम स्तर की एसएनसी/ग्राम प्रबन्ध समिति को क्रियाशील किया जाय, ताकि गांव के लोग भी स्कूल कायाकल्प में आगे आकर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा खण्ड शिक्षा अधिकारी अपने-अपने विकास खण्डों में विकास खण्ड स्तरीय जन जागरूकता एवं दायित्वबोध प्रशिक्षण कराकर स्कूल कायाकल्प को जनांदोलन का रूप दिलायें। उन्होंने कहा कि परिषदीय स्कूलों में कक्षा-01 व 02 के बच्चों के लिए कम ऊंचे के हैण्डवास के प्लटेफार्म, कक्षा-03, 04 व 05 के बच्चों के लिए कुछ ऊंचे हैण्डवास प्लेटफार्म तथा कक्षा-6 से 8 तक के बच्चों के लिए सबसे ऊंचे यानी बच्चों के लम्बाई के अनुरूप हैण्डवास वेसिंगयुक्त प्लेटफार्म बनाये जाएँ। उन्होंने कहा कि खण्ड शिक्षा अधिकारी अपने-अपने विकास खण्डों के नोडल अधिकारियों, अध्यापकों व सामुदायिक सहयोग के लिए जुड़ें नागरिकों का गु्रप बनाकर निर्धारित एक्सलशीट में रोजाना अपनी प्रगति रिपोर्ट मुहैया कराएँगे।

इस मौके पर जिलाधिकारी एस0 राजलिंगम, मुख्य विकास अधिकारी ए0के0 द्विवेदी के अलावा बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ0 गोरखनाथ पटेल, डीपीआरओ आर0के0 भारती, जिला स्तरीय अधिकारीगण, खण्ड विकास अधिकारीगण, खण्ड शिक्षा अधिकारीगण, कायाकल्प से जुड़े नोडल अधिकारगण, तकनीकी अधिकारीगण सहित अन्य सम्बन्धितगण मौजूद रहे।


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