महाराष्ट्र मंत्रिमंडल विस्तार के बाद बढ़ा रार, संग्राम थोपटे के समर्थकों ने कांग्रेस कार्यालय में की तोड़फोड़

महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेस विधायकों में असंतोष दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। पार्टी में कलह की स्थिति बन गई है। पुणे के विधायक संग्राम थोपटे के समर्थकों ने कांग्रेस कार्यालय में तोड़फोड़ की, क्योंकि उन्हें मंत्री पद नहीं दिया गया। इस मामले में पुलिस ने 19 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। थोपटे ही नहीं, पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटी प्रणीति शिंदे को भी मंत्रिमंडल से बाहर रखा गया।
संग्राम थोपटे के समर्थकों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी को पत्र लिखा है, जबकि कुछ ने पार्टी के प्रति विद्रोही रवैया दिखाया है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इन लोगों से पार्टी के भीतर कर्नाटक जैसे किसी प्रकार के विद्रोह को खत्म करने के लिए बात करेंगे।

वहीं, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख बाला साहेब थोराट ने बुधवार को पार्टी के अंदर विधायकों की असंतुष्टि की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। थोराट ने संग्राम थोपटे के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘मैंने उनसे (थोपटे से) बात की है। कांग्रेस एक परिवार जैसा है और उन्हें उनका हक मिलेगा।’ थोराट ने आगे कहा कि चूंकि प्रदेश में तीन पार्टियों की सरकार है, ऐसे में हमें कम मंत्रीपद मिला है।

संग्राम थोपटे के अलावा कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेता भी उद्धव सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर नाराज हैं। बताया जा रहा है कि सुशील कुमार शिंदे, पूर्व सीएम पृथ्वीराज चव्हाण जैसे सीनियर कांग्रेस लीडर मंत्री पद के बंटवारे में अपनी अनदेखी को लेकर नाराजगी जाहिर करने के लिए सोनिया गांधी से मुलाकात करने वाले हैं।

वहीं, मंत्री पद पाए कांग्रेस नेताओं में भी अपने कैबिनेट पोर्टफोलियों को लेकर नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्‍व मंत्रालय को लेकर कांग्रेस-एनसीपी आमने-सामने हैं। इसे लेकर दोनों दलों के नेताओं ने सीएम उद्धव ठाकरे से संपर्क साधने की कोशिश की है, और अपील की है कि पार्टी के बड़े नेताओं को उनके कद के मुताबिक मंत्री पद आवंटित किए जाएं।

इसके अलावा कांग्रेस के अन्य विधायक जिन्होंने सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं बोला, उन्होंने पार्टी के समक्ष अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं। कुछ विधायकों ने कहा है कि वे स्थिति से अवगत कराने के लिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिलेंगे। हालांकि नई दिल्ली के हस्तक्षेप से परिणाम यह हुआ है कि प्रणीति शिंदे ने पार्टी के साथ किसी तरह के मतभेद से इनकार किया है और वहीं संग्राम थोपटे ने भी कहा है कि वह पार्टी के साथ हैं।

इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस के मंत्रियों ने मल्लिकार्जुन खड़गे, के.सी. वेणुगोपाल और पार्टी सचिव आशीष दुआ के साथ सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की और स्पष्ट रूप से असंतोष के बारे में बात की। बाला साहेब थोराट और अशोक चव्हाण सहित वरिष्ठ मंत्रियों ने भी शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की।

मुंबई से दो बार के विधायक रहे अमीन पटेल को कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीद थी, लेकिन असलम शेख और वर्षा गायकवाड़ को मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया। मुंबई में पूर्व मंत्री आरिफ नसीम खान, जो चुनाव हार गए थे, को भी परेशान माना जा रहा है। अब उन्होंने मांग की है कि महाराष्ट्र सरकार केरल का अनुसरण करे और एक सीएए विरोधी प्रस्ताव पारित करे। वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी नेतृत्व को अपनी शिकायतों से अवगत कराया।

एक सूत्र ने बताया कि विधानसभा चुनाव में चौथे स्थान पर रही कांग्रेस अब पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को समायोजित करने की योजना बना रही है और कई को संगठनात्मक कार्य सौंपा जा सकता है। 12 कांग्रेस नेताओं को कैबिनेट में जगह मिली है और कुछ प्रमुख विभागों पर नजर है। स्पीकर के पद के अलावा, पार्टी को एक नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करना है, क्योंकि बाला साहेब थोराट को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, जो स्पीकर के पद के लिए सबसे आगे थे, को अब अगले राज्य कांग्रेस प्रमुख के रूप में चुना जा रहा है। एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण अब उद्धव ठाकरे कैबिनेट का हिस्सा हैं।

कल होंगे विभागों के आवंटन
वहीं, मंत्रिमंडल विस्तार के दो दिन बाद भी गठबंधन सहयोगियों शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेता विभागों के आवंटन को लेकर बातचीत कर रहे हैं। बुधवार शाम तक यह स्पष्ट नहीं हो सका था कि विभागों के आवंटन की घोषणा कब की जाएगी। सोमवार को 36 नए मंत्री बनाए जाने के साथ ही मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या बढ़कर 43 हो गई। इनमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, राज्य सचिवालय में हुई एक बैठक में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण, बालासाहेब थोराट, विजय वडेट्टीवार और नितिन राउत, एनसीपी के अजित पवार, जयंत पाटिल और एकनाथ शिंदे विभागों के आवंटन को अंतिम रूप दे रहे थे। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पार्टी इस बात से नाराज है कि उसे कृषि और सहकारिता जैसे ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित कोई भी विभाग नहीं मिला है। सूत्रों ने कहा, ‘हम अन्य दो दलों के साथ विभागों की अदला-बदली कर सकते हैं। हम विभागों की संख्या में वृद्धि की मांग नहीं कर रहे हैं।’ इस मौके पर अजित पवार ने स्‍पष्‍ट किया है कि विभागों के बंटवारे को लेकर शिवसेना और कांग्रेस के नेताओं में कोई नाखुश नहीं है।


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