प्रेम और मानवता का संदेश देने वाले प्रभु यीशु ने किये थे,कई बार चमत्कार,पढ़े

इस दुनिया को प्रेम और मानवता का संदेश देने वाले प्रभु यीशु ने कई बार चमत्कार किए। एक बार प्रभु यीशु के उपदेशों को सुनने के लिए बहुत बड़ी सभा हुई। तीन दिन तक लोग प्रभु यीशु के साथ रहे। उन्होंने अपने चेलों से कहा कि सभी के लिए भोजन की व्यवस्था करें। चेलों ने कहा, प्रभु, जंगल में इतनी रोटियां कहां से लाएं। प्रभु यीशु ने कहा, तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं। चेलों ने बताया कि सात रोटी और कुछ भुनी हुई मछलियां हैं। प्रभु यीशु ने लोगों को पंक्ति में बैठा दिया और परमेश्वर से आशिष मांगा। सब लोगों ने पेट भरकर भोजन किया और बचे हुए भोजन से सात टोकरे भर गए। खाने वालों में चार हज़ार लोग थे।

प्रभु यीशु ने बीमारों की हर तरह की बीमारी का उपचार किया। ऐसा कोई भी रोग नहीं था, जिसे वह दूर न कर सके हों। एक बार प्रभु यीशु सागर पार कर रहे थे कि अचानक आंधी चलने लगी। प्रभु यीशु ने आंधी की तरफ देखकर कहा खामोश हो जाओ और आंधी थम गई। एक बार वह समुद्र में उठती लहरों पर भी चले। प्रभु यीशु 12 वर्ष के हुए तो यरूशलम में दो दिन रुककर पुजारियों से ज्ञान चर्चा करते रहे। 30 वर्ष की उम्र में उन्होंने येरुशलम में यूहन्ना से दीक्षा ली। दीक्षा के बाद वे लोगों को शिक्षा देने लगे। जब उन्हें क्रूस पर लटका दिया गया उस वक्त उनकी आयु लगभग 33 वर्ष थी। रविवार को प्रभु यीशु ने येरुशलम में प्रवेश किया था। इस दिन को पाम संडे कहा जाता है। रविवार के दिन एक स्त्री ने उन्हें उनकी कब्र के पास जीवित देखा। जीवित देखे जाने की इस घटना को ईस्टर के रूप में मनाया जाता है।

नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।



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