एपीआर का एनआरसी और सीएए से कोई लेना देना नहीं है – अमित शाह

गृहमंत्री CAA, (NRC) व NPR को लेकर न्यूज एजेंसी एएनआई से बात की और अपना पक्ष स्पष्ट किया । बता दें कि आज नरेंद्र मोदी सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में फैसला लिया है कि 2021 की जनगणना के साथ नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर को भी अपडेट किया जाएगा। केंद्र सरकार ने एनपीआर के लिए 3500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है जो अगले साल अप्रैल, 2020 से सितंबर, 2020 के बीच किया जाएगा।

अमित शाह के इंटरव्यू की पूरी बातें

■ डिटेंशन सेंटर की व्यवस्था पहले से चली आ रही है। ये कोई एनआरसी के लिए नहीं बनाया गया।

■ एपीआर का एनआरसी और सीएए से कोई लेना देना ही नहीं है।

■ नागरिकता कानून को लेकर सबसे ज्यादा उत्तर पूर्वी राज्यों में विरोध की उम्मीद थी, लेकिन वहां तुलनात्मक रूप से शांति रही। बाकी जगहों पर राजनीतिक विरोध हुआ।

■ जहां तक पुलिस का सवाल है तो उनको बराबर ट्रेनिंग दी जाती है। पुलिस को फायरिंग करने का स्टेज तब आता है जब जान पर खतरा होता है।

■ सीएए के लिए एक भ्रांति फैलाई गई, इस प्रकार से एनपीआर के लिए भ्रांति नहीं फैलाई जाए।

■ हर राज्य इसके लिए अपना जनगणना अधिकारी तय करेगा। भारत सरकार तो सब जगह करने नहीं जाने वाली।

■ एनपीआर न तो हमारे घोषणा पत्र का एजेंडा और ना ही हमारा बनाया हुआ। ये यूपीए सरकार की एक्सरसाइज है।

■ जिस राज्य के सीएम ने इनकार किए हैं उनसे मैं बात करूंगा और उनको समझाने का पूरा प्रयास करूंगा। जनगणना 2021 में होना जरूरी है क्योंकि हर दस साल पर होती है। एनपीआर और जनगणना की एक्सरसाइज लगभग एक जैसा है इसलिए एनपीआर को अपडेट किया जाएगा।

■ एनआरसी पर अभी चर्चा करने की कोई जरूरत ही नहीं है। मेरी पार्टी का घोषणा पत्र अपनी जगह पर है। और जब होगा तो पूरी एक्सरसाइज होगी।

■ पूरे देश से मैं कहना चाहता हूं कि एनपीआर के डेटा का इस्तेमाल एनआरसी के लिए नहीं किया जाएगी। क्योंकि दोनों कानून अलग हैं।

■ सीएए को लेकर भी लोग अब समझने लगे कि इससे किसी की भी नागरिकता नहीं जाने वाली है लेकिन अब जब विवाद खत्म हो रहा है तो एनपीआर को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है।

■ एनपीआर के डेटा के अनुसार भारत के आने वाले 10 साल के विकास का खाका तैयार होगा। हां, इसमें आधार कार्ड की जानकारी देने का प्रावधान है।

■ इसके लिए हमने एक ऐप बनाया है जिसे लोग भर कर भेज सकते हैं। जो जानकारी आप देंगे सरकार उसका रजिस्टर बनाएगी। उसी आधार पर सरकार विकास का खाका तैयार करेगी।

■ ये पूरी एक्सरसाइज कांग्रेस के बनाए कानून के अंतर्गत ही हो रही है। 2010-2011 में ये एक्सरसाइज हो चुकी है। देश की जनता से निवेदन है कि आप बहकावे में मत आइए। एनपीआर का एनआरसी से कोई लेना देना नहीं है।

■ राज्यसभा में भी कहा था कि ये नागरिकता देने का कानून है लेने का कही कोई प्रावधान ही नहीं है।

■ संसद का मेरा भाषण देख लीजिए इसमें किसी की नागरिकता जाने का कोई बात ही नहीं है।

■ इसके बारे में लोगों को गलत तरीके से समझाया जा रहा है।

■ हमने नोटिफिकेशन निकाला 31-7-19 को। अब सीएए को लोग समझने लगे तो अब एनपीआर पर बवाल खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।

■ मैं बंगाल और केरल की सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि आप राजनीति के लिए ऐसे मत करिए और फैसले पर विचार करें।

■ सीएए के लिए अब जनता के मन से भय दूर हो गया है इसलिए कुछ लोग अब एनपीआर का भय खड़ा करना चाह रहे हैं।

■ सीसीए नागरिकता देने का प्रावधान है। इसमें किसी कि नागरिकता लेने का कोई सवाल ही नहीं है।

■ एनपीआर के डेटा का इस्तेमाल एनआरसी के लिए हो ही नहीं सकता।

■ 2004 में एनपीआर में यूपीए सरकार ने कानून बनाया था, 2010 में जनगणना हुई थी, उसके साथ इसे किया गया था। इस बार भी वैसा ही किया जा रहा है, इसे बीजेपी सरकार ने शुरू नहीं किया है।

■ इस बार की एनपीआर प्रक्रिया में कुछ चीजे नई है। इस प्रकार के सर्वे नहीं हुए होते तो हम गरीब के घर तक गैस नहीं पहुंचा पाते।

■ गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मैं आज इसे स्पष्ट रूप से बता रहा हूं नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का आपस में कोई संबंध नहीं है।

■ एनआरसी पर बहस करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि अभी इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है। प्रधानमंत्री ने सही कहा था इस पर न तो संसद में चर्चा हुई है और न ही मंत्रिमंडल में।

■ एनपीआर के लिए अभी जो प्रक्रिया चल रही है इसका कभी भी एनआरसी के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है।

■ 2010 में जब जनगणना हुई तब इसके साथ एनपीआर को किया गया था। इसलिए अब 2020 में जब फिर से जनगणना हो रही है तो एनपीआर किया जा रहा है।

■ एनपीआर में केवल जानकारी भरनी होगी। वो भी ऐप के जरिए भर सकते हैं।



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