शहर से गांव तक मरीजों का खून चूस रही हैं अवैध पैथोलॉजी लैब, जांच के नाम पर चल रहा गोरखधंधा

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

– मरीजों के खून जाँच के नाम पर चल रहा गोरखधंधा

– सही जाँच रिपोर्ट नहीं मिलने से मरीजों को गवानी पड़ती है जान

– स्वास्थ्य विभाग बना रहता है मूक दर्शक

– मरीजों के खून की जाँच के नाम पर कितना संजीदा है स्वास्थ्य विभाग

सोनभद्र । एक गलत रिपोर्ट और दवाई का सेवन करते ही मरीज की मौत तय…। जिस पैथोलॉजी की रिपोर्ट पर भरोसा करके डॉक्टर दवाएं लिखते हैं और मरीज उस दवाओं को खाते हैं, अगर वही अवैध तरीके से संचालित हैं, तो भला मरीजों की जिंदगी खतरे में तो रहेगी ही। जानकारी के अनुसार जिले में अवैध तरीके से सैकड़ों पैथोलॉजी सेंटर फल-फूल रहे हैं। इसका फायदा प्राइवेट क्लिनिक के डॉक्टर खूब उठा रहे हैं।

पेश है एक रिपोर्ट…

जिले में मरीजों की जांच के नाम पर लूट मची हुई है। शहर से गांव तक बिना पैथोलाजिस्ट और रजिस्ट्रेशन के चल रहे अवैध पैथोलॉजी को सीएमओ ने पूरी छूट दे रखी है। तभी तो आज तक न एक भी पैथोलॉजी के खिलाफ न जांच हुई न कार्रवाई। हद तो यह हो गई है कि एक ही लाइसेंस पर कई-कई पैथोलोजी लैब चल रही हैं। अहम बात यह है कि इसकी जानकारी अधिकारियों को भी है। बावजूद अंजान बने हुए हैं। कार्रवाई न होने की वजह से अवैध लैब संचालकों के हौंसले इतने बढ़ गए हैं कि लैब में मरीजों का खुले आम खून चूसा जा रहा है, क्योंकि इन लैब में कराई गई जांचों की रिपोर्ट कितनी सही होगी, इसका जवाब देने के लिए कोई भी तैयार नहीं है।
बताते चलें कि जनपद में महज 15 पैथालॉजी का पंजीकरण सीएमओ कार्यालय में हुआ है लेकिन शहर से गाँव तक देखा जाय तो सैकड़ों की संख्या में पैथोलॉजी लैब का संचालन किया जा रहा है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

पूरे प्रकरण पर पंजीकरण एवं झोलाछाप डॉक्टर्स नोडल डॉ0 रामकुंवर ने बताया कि “अभी पूरे जनपद के पैथोलॉजी सेंटर की मैपिंग की जा रही है। जो पैथोलॉजी नियम विरुद्ध संचालित हो रहे हैं, उन्हें नोटिस देकर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।”

मरीज डॉक्टर के यहां जाते हैं और वहां से डॉक्टर विभिन्न अवैध जांच घरों में जांच कराने को कहते हैं, जबकि ज्यादातर डॉक्टरों को यह पता है कि बगैर पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर के हस्ताक्षर के बिना रिपोर्ट मान्य नहीं है, लेकिन फिर भी धड़ल्ले से कलेक्शन सेंटर के नाम पर जांच का कारोबार चल रहा है। सरकारी चिकित्सकों की मानें तो जिले में पैथोलॉजिस्ट डॉक्टरों की काफी कमी है, इसके बावजूद अगर पैथोलॉजी सेंटर संचालित हैं तो मरीज सतर्क हो जाएं।


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