सरकार का निर्देश दरकिनार, लेखपालों का प्रदर्शन बरकरार

आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । एस्मा लगने और लेखपालों पर निलंबन व बर्खास्तगी की कार्यवाही के बाद भी लेखपाल संघ का आंदोलन थमने का नाम नही ले रहा है। निलंबन की कार्यवाही के बावजूद लेखपालों ने आज भी अपना धरना अनवरत जारी रखा है। आज कलेक्ट्रेट परिसर में धरना हुआ। गलनभरी सर्दी की सुबह में धरने में 200 के करीब लेखपाल शामिल हुए। इस धरने की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष रामाश्रय ने किया। इस धरने में लेखपालों पर निलंबन व बर्खास्तगी की कार्यवाही को लेकर आक्रोश देखने को मिला। वेतन विसंगति सहित तमाम माँगों को लेकर लेखपाल काफी समय से आंदोलित है। इस आंदोलन में सरकार की बर्खास्तगी की कार्यवाही ने आग में घी डालने का काम कर दिया है। लेखपाल संघ अब इस लड़ाई को सरकार से आर पार लड़ने के मूड में है।

लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष रामाश्रय का कहना है कि “जिला प्रशासन ने आठ कर्मचारियों पर बर्खास्तगी तथा 25 लेखपालों पर “नो वर्क नो पे” के तहत नोटिस जारी करने की कार्यवाही प्रशासनिक स्तर की जल्दबाजी का नतीजा है जबकि अन्य जनपदों में ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिलाध्यक्ष का कहना है कि यह आंदोलन अंतिम दम तक शांतिपूर्ण ढंग से लड़ा जाएगा।”

वहीं महिला लेखपाल अंजना कुमारी का कहना है कि “प्रशासन स्तर से जो भी कार्रवाई की जा रही हैं, ये बिल्कुल गलत है। हमें अपने मौलिक अधिकारों को मांगने का पूरा अधिकार है। अधिकारियों द्वारा अधिकारियों द्वारा तहसील स्तर पर पदाधिकारियों को बुलाकर उन्हें हड़ताल वापस लेने की धमकी दी जा रही है मगर हड़ताल वापस लेने का कोई विकल्प नहीं है जब बर्खास्तगी हो ही गई है तो हम हड़ताल करेंगे और अंतिम दम तक करेंगे। यदि प्रशासन हमें जेल में डाल देती है तो जेल से आने के बाद यहाँ आकर फिर दरी पर बैठेंगे। महिला लेखपाल ने आठ सूत्रीय मांगों से हटकर भी अपनी समस्या को मिडिया के सामने रखा। महिला लेखपाल का कहना है कि उन्हें छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर भी जूझना पड़ता है। महिला लेखपाल ने बताया कि उन्हें अपना वेतन खुद बनाना पड़ता है, यहाँ तक कि अपनी सर्विस बुक तक मेंटेन नहीं रहता यह बहुत शर्म की बात है। महिला लेखपाल ने महिला कर्मचारियों की समस्या को उठाते हुए प्रशासन की पोल खोल दी। महिला लेखपाल ने बताया कि तीनों तहसीलों में महिला शौचालय तक नहीं है जिससे बहुत दिक्कत होती है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को कई बार सूचना दी गयी लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। ओडीएफ को लेकर पूरे जनपद में वाहवाही लूटी जा रही है और प्रमाणपत्र लिए जा रहे हैं।”

इस दौरान विकास यादव, अंजना सिंह, साजिद खान, चंदू शर्मा, सुबोध सिंह, कंचन मौर्या, सोनालिका तिवारी, अनीता चौबे समेत सैकड़ों की संख्या में लेखपाल उपस्थित रहे।



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