श्रीराम लीला के सप्तम दिवस पर धनुष यज्ञ लीला का हुआ मंचन

घनश्याम पांडेय/विनीत शर्मा (संवाददाता)

चोपन । चोपन के सिंदुरिया गांव में परंपरागत आयोजित श्रीराम लीला के सप्तम दिवस पर धनुष यज्ञ की लीला का मंचन किया गया। जब स्वयंवर स्थल पर विश्वामित्र के साथ राम और लक्ष्मण पहुंचे उस समय जो राजा अपने अपने वीरता का वर्णन कर रहे थे वो बलहीन हो गये। रावण और वाणासुर का आक्रामक संवाद उल्लेखनीय रहा, महाराज जनक की अनुमति से बंदीजन राजाओं को धनुष उठाने के लिए बोला गया फिर सभी राजा एक साथ मिलकर प्रयास किये किंतु असफलता ही हाथ लगी। यह दृश्य देखकर जनक जी बहुत दुखी होकर बोले यदि मैं जानता पृथ्वी वीरों से ख़ाली है तो ऐसा प्रण नहीं करता ऐसा सुनकर लक्ष्मण जी ने क्रोध से में भगवान से बोले कि जिस सभा में रघुवंशी मौजूद हों वहां ऐसा कहना शर्मनाक है।

इस लिए आज आप जनक जी के प्रण पूरा नहीं किए तो मैं फिर कभी भी धनुष बाण नहीं धारण करुंगा। फिर महर्षि विश्वामित्र के अनुमति से भगवान ने धनुष भंग किया और सभी को आनंदित किया। धनुष भंग की आवाज परशुरामजी को सुनाई दी तो वो भी पहुंचे जहां उनका लक्ष्मण जी के साथ संवाद होता है फिर भगवान राम के गूढ़ वचन सुनकर उन्हें रामावतार होने की बात ज्ञात हुआ और अपना संदेह मिटने के बाद वन में तपस्या के लिए प्रस्थान कर गए। विपरीत मौसम के बाद भी श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई एक हजार से अधिक लोगों की उपस्थिति में राम लीला संपन्न हुआ।इस मौके पर रामलीला समिति के अध्यक्ष सुरेश पांडेय, व्यास मुरली तिवारी, विजयानंद तिवारी, विद्या शंकर पांडेय, उदय नारायण पांडेय, राम नारायण पांडेय, प्रेम शंकर पांडेय, श्रीराम पांडेय, महावीर प्रसाद पांडेय, आदित्य नारायण पांडेय, विशाल पांडेय, मनीष, रवि, कृपा शंकर पांडेय, विजय शंकर पांडेय, कमलेश, राम जानकी पांडेय, अशोक पांडेय, और समस्त पांडेय परिवार और सैकड़ों संख्या में गांव के लोग मौजूद रहे।


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