मानवाधिकार दिवस पर जागरूकता गोष्ठी का किया गया आयोजन

दीनदयाल शास्त्री (ब्यूरो)

पीलीभीत । राम लुभाई साहनी महिला राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई 1 व 2 तथा समाधान विकास समिति के तत्वाधान में मानवाधिकार दिवस के अवसर पर जागरूकता गोष्ठी तथा प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया। जागरूकता गोष्ठी में मानवाधिकार विद उर्मिला देवी ने बताया कि मानवाधिकारों से अभिप्राय मौलिक अधिकार एवं स्वतंत्रता संबंधी अधिकारों से है। इसके सभी मानव प्राणी हकदार हैं। अधिकारों और स्वतंत्रता के रूप में जिनकी गणना की जाती है वह नागरिक, राजनीतिक, जीवन, आजादी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून के समक्ष समानता, आर्थिक और सामाजिक, सांस्कृतिक अधिकारों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने की स्वतंत्रता, भोजन और काम करने का अधिकार, शिक्षा का अधिकार सम्मिलित हैं। साथ ही बताया गया है कि मानवाधिकारों को तीन पीढ़ियों में बांटा जा सकता है।पहली पीढ़ी स्वतंत्रता और राजनीति से संबंधित अधिकार हैं। इन्हें नीला अधिकार कहते हैं। दूसरी पीढ़ी में समानता से संबंधित अधिकार हैं इनकी पूरा करने की जिम्मेदारी संसाधन होने पर सरकार की बनती है इन्हें लाल अधिकार देते हैं। तीसरी पीढ़ी जिन्हें हरे अधिकार कहते हैं अनौपचारिक हैं।
समूह एवं सामूहिक अधिकार, आत्म निर्णय का अधिकार, आर्थिक और सामाजिक विकास का अधिकार आदि इनमें आते हैं। युवा पीढ़ी का आह्वान किया कि मानवाधिकारों को अधिक से अधिक जाने तथा समाज में ऐसा वातावरण बनाए जिससे सभी लोग मानवाधिकारों के प्रति प्रेरित हों तथा उनके उल्लंघन के प्रति सचेत रहें।प्रभारी प्राचार्य डा दिनेश चन्दा, प्रोफेसर नरेंद्र बत्रा, माजिद हुसैन, डा कामरान आलमआदि ने भी विचार प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर मानवाधिकार जागरूकता प्रश्नोत्तरी की का आयोजन किया गया जिसमें आरोही सिंह व रूपाली गंगवार ने श्रेष्ठता दिखाई। इन्हें प्रशस्ति पत्र व पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। छात्राओं को मानवाधिकार के अनुकूल समाज में वातावरण बनाने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम से मानवाधिकारों की जागरूकता के प्रयासों को गति मिली है।



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