गीता जंयती पर विचार गोष्ठी का आयोजन

आनंद चौबे/विवेक मिश्रा (संवाददाता)

सोनभद्र । गीता जयंती के अवसर पर रविवार को रावर्टसगंज के जयप्रभा मंडपम में गीता जयंती समारोह समिति द्वारा ‘गीता के आलोक में कर्म’ विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि गीता के अनुसार कर्म का शुद्ध अर्थ आराधना है। ईश्वर को प्राप्त करने के लिए जो क्रिया महापुरुष संपादित करते रहे हैं, गीता उसी कर्म की अनुशंसा करती है।गीता में है कि यज्ञ को कार्य रूप देना ही कर्म है और यह यज्ञ कोई भौतिक यज्ञ नहीं है। यह अन्न आदि का अग्नि में हवन नहीं है, बल्कि गीता जिस यज्ञ का समर्थन करती है वह श्वास का प्रश्वास में और प्रश्वास का श्वास में हवन करने से है। गोष्ठी का शुभारंभ अपर जिलाधिकारी योगेन्द्र बहादुर सिंह ने यथार्थ गीता के प्रणेता स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अर्जुन की तरह दृढ़ निश्चय वाला व्यक्ति ही गीता के पथ पर चल सकता है।

अध्यक्षता करते हुए डाॅ0 बी सिंह ने कहा कि ईश्वर तक की दूरी तय करने की प्रक्रिया ही कर्म है। इसके लिए गीता के अनुसार यज्ञ करना पड़ेगा। भौतिक यज्ञ के बजाय श्वास का प्रश्वास में और प्रश्वास का श्वास में हवन करना पड़ेगा। कवि जगदीश पंथी ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि गीतोक्त कर्म निश्चित परिणाम देता है। दूनिया में सभी कर्म अनिश्चित परिणाम वाले हैं, मात्र गीतोक्त कर्म ही परिणाम की गारंटी देता है। कथाकार रामनाथ शिवेंद्र ने गीता के समाजशास्त्रीय अध्ययन पर बल देते हुए कर्म की व्याख्या की। डाक्टर अर्जुन दास केसरी, पारसनाथ मिश्र, डॉ 0 रमाशंकर त्रिपाठी, बालेश्वर सिंह यादव आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किया। संयोजक डॉ0कुसुमाकर ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया और संचालन भोलानाथ मिश्रा ने किया। इस मौके पर चंद्रकांत शर्मा,ईश्वर विरागी, धनंजय पाठक,उमाकांत मिश्रा,डॉ0 प्रसन्न पटेल,डा0 सुधीर मिश्रा,प्रभाकर श्रीवास्तव,उमेश प्रताप सिंह, राजू तिवारी, सच्चिदानन्द पांडेय, राजेश सिंह,गणेश पाठक, कृपाशंकर चौबे,मनोज शुक्ला आदि उपस्थित रहे, रविन्द्र केसरी, आशीष अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।

गीता जयंती के अवसर पर गोष्ठी के दौरान गीता के अविनाशी योग के प्रचार प्रसार में योगदान देने वाले पांच विभूतियों को स्मृति चिन्ह देकर एवं शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। आकाशवाणी ओबरा के पूर्व अधिशासी डॉ0जीपी निराला, पत्रकार भोलानाथ मिश्रा, आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता रामजनम, धनुषधारी राम चौबे, राजू तिवारी को गीता के प्रचार प्रसार के लिए समानित किया गया। इस मौके पर डॉ 0 कुसुमाकर ने पांच असहाय गरीबों को कंबल वितरित किया।


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