प्रदेश में भांग की दूकान में गांजा की अवैध विक्री रोकने की नियमावली जारी करने का निर्देश

* अनुपालन रिपोर्ट के साथ हलफ़नामा तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव एवं आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश को आदेश दिया है कि वह गांजे की बिक्री पर नियंत्रण के लिए नियमावली को प्रकाशित करें। अभी तक भांग बेचने के लाइसेंस के बहाने प्रदेश में गाजा की भी बिक्री अवैध रूप से की जा रही है।

याची गांजा बेचने का आरोपी है। कोर्ट ने कहा है कि याची की जमानत अर्जी 8 जनवरी 20 को सुनवाई के लिए पेश की जाए। तब तक राज्य सरकार भांग और गांजे की बिक्री पर नियंत्रण की नियमावली तैयार कर ले।

यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने चैतन्य बिश्नोई कि जमानत अर्जी पर दिया है। आबकारी विभाग उत्तर प्रदेश प्रयागराज के संयुक्त आयुक्त अरूण कुमार शुक्ला ने कोर्ट को बताया कि विभाग भांग की दुकान के लाइसेंस की आड़ में गांजे की बिक्री पर रोक लगाने पर गंभीरता पूर्वक विचार कर रहा है । जिसके लिए एक नियमावली बनाई जा रही है। जो पूरे प्रदेश में अवैध रूप से गांजा की बिक्री को नियंत्रित करेगी। इस पर कोर्ट ने कहा है कि इस संबंध में सरकार उचित कदम उठाये और सरकारी अधिवक्ता से आबकारी विभाग की अनुपालन रिपोर्ट के साथ हलफनामा दाखिल करने को कहा है। सुनवाई 8 जनवरी को होगी।

अवमानना कोर्ट अधिकार के बाहर नहीं दे सकती आदेशःहाईकोर्ट

आयुक्त ग्रामीण विकास के खिलाफ अवमानना कार्रवाई पर रोक

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अवमानना अदालत को ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं है जो मूल अदालत के आदेश के अनुपालन के स्कोप से बाहर का हो। कोर्ट ने अवमानना आदलत के 18 नवंबर 2019 को पारित आदेश पर रोक लगा दी है। जिसके तहत अपीलार्थी को प्रथम दृष्टया अवमानना का दोषी करार दिया गया था और अवमानना आरोप निर्मित किए जाने के लिए हाजिर होने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने विपक्षी खुशबू कुमारी गुप्ता को नोटिस जारी कर 6 हफ्ते में जवाब मांगा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति भारती सप्रू तथा न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने के.रविंद्र नायक, आयुक्त ग्रामीण विकास उत्तर प्रदेश की विशेष अपील की सुनवाई करते हुए दिया है। खुशबू कुमारी ने ग्राम विकास अधिकारी की भर्ती में आवेदन दिया था। साक्षात्कार के बाद चयन परिणाम घोषित नहीं किया गया तो याचिका दाखिल की गयी जो खारिज हो गयी। विशेष अपील पर कोर्ट ने परीक्षा परिणाम घोषित करने का आदेश दिया था और कहा था याची को सूचित किया जाए। परिणाम घोषित होने के बाद नियुक्ति न होने पर अवमानना याचिका दाखिल की।

ट्रिपल सी मान्य संस्था से न होने के कारण नियुक्ति नहीं हो सकी। कोर्ट ने अपीलार्थी को प्रथम दृष्टया अवमानना का दोषी करार दिया और कहा अवमानना का आरोप निर्मित करने के लिए हाजिर हो। जिसे इस विशेष अपील में चुनौती दी गई थी ।कोर्ट ने कहा कि स्कोप के बाहर जाकर अवमानना कोर्ट द्वारा की गई कार्रवाई को सही नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया दोषी करार देने एवं आरोप निर्मित करने के लिए तलब करने के आदेश पर रोक लगा दी है।और कहा कि अवमानना अदालत का आदेश स्कोप से बाहर है।

डेंगु की रोकथाम के लिए याचिका दाखिल, सुनवाई आज

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में डेंगू की रोकथाम और बचाव तथा डेंगू पीड़ितों को उपयुक्त उपचार उपलब्ध कराने के लिए जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका अधिवक्ता सुनीता शर्मा की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता के वकीलांे का कहना है कि डेंगू हर मौसम में पाया जाता है। मगर इससे रोकथाम और बचाव के लिए नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग कोई उपाय नहीं कर रहा हैं। कहीं पर भी छिड़काव नहीं किए गए हैं। अस्पतालों में डेंगू पीड़ितों के इलाज के लिए कोई सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही है। अस्पताल की स्थिति यह है कि जरूरत पड़ने पर मरीजों को प्लेटलेट्स मुहैया कराना मुश्किल हो जाता है। मांग की गई है जिलों में डेंगू से बचाव, रोकथाम और डेंगू के मरीजों के इलाज के लिए उचित व्यवस्था की जाए। याचिका पर बुधवार को सुनवाई होने की संभावना है।

उच्च न्यायालय सेवा संवर्ग मे 249 पदांे का सृजन

न्यायपीठ सचिव संवर्ग के 03 अधिकारियो और उच्च न्यायालय सेवा के 34 सहायक समीक्षा अधिकारियो को मिली पदोन्नति

प्रयागराज। प्रमुख सचिव (न्याय) एवं विधि परामर्शी के शासनादेश दिनांक 02 दिसम्बर 2019 के अनुसार उच्च न्यायालय सेवा संवर्ग हेतु 160 न्यायाधीशो के सापेक्ष प्रभावी संख्या 135 न्यायाधीशों के आधार पर 40 अनुभाग अधिकारी, 149 समीक्षा अधिकारी और 60 सहायक समीक्षा अधिकारी के पदो का सृजन किया गया है। संघ के महासचिव बृजेश कुमार शुक्ल के अनुसार अभी एक निबंधक, 03 संयुक्त निबंधक, 07 उप निबंधक और 14 सहायक निबंधक के पदो के सृजन किया जाना शेष है जिस पर शीघ्र ही कार्यवाही करायी जायेगी।

महानिबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव प्रथम की अधिसूचना के अनुसार रमेश चन्द्र श्रीवास्तव को उप निबंधक सह न्यायपीठ सचिव श्रेणी तीन से संयुक्त निबंधक सह न्यायपीठ सचिव श्रेणी चार के पद पर, राकेश कुमार शर्मा, सहायक निबंधक सह न्यायपीठ सचिव श्रेणी दो के पद से उप निबंधक सह न्यायपीठ सचिव श्रेणी तीन के पद पर, बीनू सोनकर, न्यायपीठ सचिव श्रेणी एक के पद से सहायक निबंधक सह न्यायपीठ सचिव श्रेणी दो के पद पर पदोन्नति प्रदान की गयी है। अंशुमान श्रीवास्तव, सुदीप श्रीवास्तव, रंजीत प्रताप सिंह, अजीत कुमार सिंह, शुभांग मिश्र, सुशांत कुमार सिंह, अमन पाण्डेय, शिवदीप द्विवेदी, अभिषेक कुमार पाण्डेय, कार्तिकेय पाठक, गौरव श्रीवास्तव, धीरज कुमार सोनी, राजीव कुमार कटियार, जयराम सिंह, सौरभ गुप्ता, शशी प्रकाश गुप्त, हरि किशुन (लखनऊ), दीप रश्मि गुप्ता, अनामिका वर्मा, शिवेन्द्र मिश्र, मनोज कुमार, आदर्श सिन्हा, जगमोहन, जिया अब्बास, अशोक कुमार सिंह, महाजबीन फातिमा अहमद, संजय कुमार, सुनील कुमार गौड़, मोहम्मद समीर सिद्दीकी, विशाल निगम (लखनऊ), विनय कुमार यादव (लखनऊ), गुफरान अहमद सिद्दीकी, विशाल आनंद को सहायक समीक्षा अधिकारी के पद से समीक्षा अधिकारी के पद पर पदोन्नति प्रदान की गयी है।

सरकारी जमीन पर बने स्कूल की मान्यता निरस्त करने पर निदेशक को निर्णय लेने का निर्देश

जिला पंचायत राज अधिकारी कर रहे हैं अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक उ.प्र. को सरकारी जमीन पर बने बाबा सुख्खू मां प्रभु देवी इंटर कालेज गोलागौर जौनपुर की मान्यता निरस्त करने के संबंध में की गई शिकायत पर 3 माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अवैध निर्माण व अतिक्रमण के मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी जौनपुर ने पहले ही उचित कदम उठाए हैं। इस संबंध में कार्यवाही पूरी की जाए। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने चंद्र प्रताप व अन्य की जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याची का कहना है कि ग्राम प्रधान आशा यादव कालेज की प्रबंधक है जिन्होंने गोला गौर गांव सभा की जमीन पर अवैध रूप से स्कूल का निर्माण किया है। विधायक निधि से 30लाख खर्च कर भवन का निर्माण कराया गया है। याचिका में विधायक निधि के गवन की प्राथमिकी दर्ज कराने तथा विद्यालय की मान्यता वापस लेने की मांग की गई है। साथ ही अतिक्रमण को हटा कर गांव सभा को जमीन वापस करने की भी मांग की गई है। कोर्ट ने याची को 4 सप्ताह के भीतर अपनी शिकायत प्रत्यावेदन के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा निदेशक को देने को कहा है। निदेशक 3 माह में उस पर निर्णय लेंगे।

आयुक्त वाराणसी को गलियों से अतिक्रमण हटाने की मांग पर निर्णय लेने का निर्देश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी विकास प्राधिकरण के नियमों के विपरीत हुए अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर मंडलायुक्त को दो माह के भीतर याची की शिकायत के निस्तारण का निर्देश दिया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खंडपीठ ने रित्विक साहा की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता जागृति सिंह ने बहस की। याची का कहना है कि वाराणसी के संकरी गलियों में होटलों का संचालन किया जा रहा है। जब कि 12 मीटर से अधिक चैडी सड़क पर ही होटल निर्माण किया जा सकता है। याचिका में सड़क व गलियों से अतिक्रमण हटाने की भी मांग की गई है। कोर्ट ने कहा है कि याची के प्रत्यावेदन को आयुक्त दो माह में निर्णीत करे और उस पर आदेश पारित करे।

बुलंदशहर बलबे में इंस्पेक्टर की मौत का मामला

आरोपी लोकेन्द्र की जमानत अर्जी खारिज

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खेतों में गोवंश के अवशेष पाए जाने को लेकर बुलंदशहर में पुलिस पर भीड़ के हमले में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत मामले में आरोपी लोकेंद्र को जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि युवा जोश किसी भीड़ को पुलिस अथारिटी पर हमले का लाइसेंस नहीं देता। यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने दिया है। 3 दिसम्बर 18 को बुलंदशहर के सयाना थाना क्षेत्र में खेत में गौवंश अवशेष पाये जाने पर बलबा हुआ। याची पर भीड़ के साथ लोक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, बलवा करने का आरोप है। जिसमें एक इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या कर दी गई थी। राज्य सरकार के अपर शासकीय अधिवक्ता का कहना था कि वीडियो क्लिपिंग में याची के रोल को स्पष्ट किया गया है। पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। याची का कहना था एफ आई आर में उसका नाम नहीं है। सब इंस्पेक्टर द्वारा अभियुक्तों का बयान दर्ज करने के आधार पर उसे नामित किया गया। याची का यह भी कहना था कि वह विकलांग है। ऐसी स्थिति में बल्बे में जो रोल उसका बताया जा रहा है, वह सही नहीं माना जा सकता। उसके पास से किसी प्रकार की रिकवरी नहीं हुई है। याची का यह भी कहना था कि एक अभियुक्त डेबिड सिंधू को जमानत दी जा चुकी है। इसलिए पैरिटी के आधार पर उसे भी जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस राज्य की संप्रभु प्राधिकारी है। जिस पर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है। यदि ऐसी घटनाओं पर कार्रवाई नहीं की गयी तो इससे अराजकता फैलेगी और पुलिस ऐसे बलबे पर कार्रवाई करने से बचेगी। कोर्ट ने कहा हर किसी को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। लेकिन इस अधिकार का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता। विरोध प्रदर्शन के नाम पर भीड़ अराजक हो जाए और ऐसे कृत्य कर दे जिसमें पुलिस कर्मी की मौत हो और सरकारी संपत्ति का व्यापक नुकसान हो। ऐसे मामले में पैरिटी नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी है।



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