जो व्यक्ति मित्र सप्तमी का व्रत हैं करता,उसे सूर्यदेव नेत्र ज्योति और आरोग्य करते हैं प्रदान


मार्गशीर्ष माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन भगवान सूर्य को समर्पित मित्र सप्तमी का त्योहार मनाया जाता है। सूर्यदेव के अनेक नाम हैं, जिनमें से उन्हें मित्र नाम से भी संबोधित किया जाता है। इसलिए इस सप्तमी को मित्र सप्तमी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति मित्र सप्तमी का व्रत करता है उसे सूर्यदेव नेत्र ज्योति और आरोग्य प्रदान करते हैं।

इस दिन भगवान सूर्यदेव बहुत बलवान होते हैं। इस व्रत को सभी सुखों को प्रदान करने वाला माना गया है। इस दिन भगवान सूर्यदेव को जल से अर्घ्य अवश्य दें। इस व्रत के प्रभाव से आरोग्य व दीर्घ आयु की प्राप्ति होती है। इस दिन सूर्य की किरणों को अवश्य ग्रहण करना चाहिए। भगवान सूर्यदेव की किरणों को ग्रहण करने से चर्म तथा नेत्र रोगों से मुक्ति मिलती है। इस व्रत के प्रभाव से घर में धन धान्य में वृद्धि होती है। परिवार में सुख समृद्धि आती है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को कठिन से कठिन कार्य करने की शक्ति प्राप्त होती है। शत्रुओं को भी मित्र बनाने की क्षमता प्राप्त होती है। इस व्रत में फल, दूध, केसर, कुमकुम, बादाम से सूर्यदेव की आराधना की जाती है। सप्तमी को फलाहार कर अष्टमी को मिष्ठान ग्रहण करते हुए व्रत का पारण करें।

नोट:
इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।



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