सलईबनवा में लकड़ी के चूल्हे पर गर्म किया जा रहा था पानी वाला दूध

आनंद चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । मिड डे मील में गड़बड़ी व लापरवाही का मामला कोई नया नहीं है । चोपन ब्लाक के सलईबनवा स्कूल में पानी में दूध मिलाए जाने का मामला गरमाने के बाद प्रशासन ने इस मामले में साजिश रचने के आरोप में शिक्षा मित्र को बर्खास्त करते हुए लापरवाही के लिए अध्यापक को निलंबित कर दिया गया है । इस घटना ने जनपद समेत पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया है । भले ही इस घटना ने सभी का ध्यान दूध में मिलावट की तरफ खिंच रखा है लेकिन जिस चूल्हे पर यह दूध पक रहा है वहां किसी का ध्यान नहीं जा रहा । जबकि हर स्कूल में गैस पर खाना बनाये जाने की बात कही गयी है । लेकिन यहां भी दूध लकड़ी पर गर्म हो रहा है ।
इस घटना को लेकर जिलाधिकारी समेत शिक्षा अधिकारी भले ही हैरान हो रहे हों मगर स्कूलों में चल रही मनमानी व दुर्व्यवस्था के लिए अधिकारी खुद जिम्मेदार हैं।

सूत्रों की माने तो ज्यादातर स्कूलों की जिम्मेदारी बीआरसी-एमपीआरसी के भरोसे चल रही है । दुरस्त के स्कूल अधिकारियों के पहुंच से दूर होने के कारण कई कई विद्यालयों में अध्यापक सेटिंग कर अपनी नौकरी बज रहे हैं और आधा महीने ही नौकरी कर वेतन उठा रहे हैं । ऐसा नही कि यह सब शिक्षा विभाग के ब्लाक अधिकारियों को नहीं पता, बस विद्यालय न आने का दाम तय होना चाहिए ।

सलईबनवा घटना के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री ने एबीएसए के खिलाफ इस बात को लेकर जांच बैठा दी है कि आखिर किस आधार पर दो नियमित अध्यापकों को छुट्टी पर भेजा गया। मगर शायद मंत्री जी को यह नहीं पता कि यहां कई स्कूल ही शिक्षामित्र के भरोसे चल रही है ।
बहरहाल सोनभद्र में शिक्षा विभाग बिल्कुल बेपटरी पर आ चुकी है । जरूरत है शासन स्तर पर ऐसे नियम बनाये जाएं ताकि हर तीन या पांच साल पर अध्यापक को नया ब्लाक मिल जाय । जिससे न सिर्फ दुरस्त स्थान पर नौकरी कर रहा अध्यापक भी अच्छे जगह आ सकेगे और वर्षों से एक स्कूलों में जमे अध्यापकों को दूसरे ब्लाक में भेजा जा सके । इससे न सिर्फ कई शिक्षक पैसा देकर या जुगाड़ के माध्यम से मैदानी क्षेत्र में आने से बच जाएगे बल्कि वह निश्चित समय के लिए अपनी बेहतर कार्य क्षमता को दिखा भी सकेगा ।


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