प्रदेश में कौशल विकास मिशन के अन्तर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रशिक्षार्थी हो रहे हैं आत्मनिर्भर

दीनदयाल शास्त्री (ब्यूरो)

पीलीभीत । आज शिक्षा प्राप्त कर रहे युवक-युवतियों में रोजगारपरक शिक्षा प्राप्त करने के लिए विशेष रूचि है। रोजगारपरक शिक्षा प्राप्त करने के लिए संबंधित क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान भी जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा केन्द्र न होने से युवक-युवतियों को तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने में परेशानी होती थी।

जिसे दूर करते हुए भारत सरकार के प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री कौशल विकास मिशन योजना पूरे देश में संचालित किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री कौशल विकास मिशन योजना को प्रदेश में लागू करते हुए विभिन्न ट्रेडस में प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था की है।
मुख्यमंत्री का उद्देश्य है कि प्रदेश के शिक्षित नवयुवक स्वयं मनमाफिक पाठ्यक्रमों/ट्रेड्स में प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनें।
कौशल विकास मिशन का मुख्य उद्देश्य है कि प्रदेश के युवक-युवतियों को रोजगार के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना ताकि वे प्रशिक्षित होकर अपने पैरों पर खड़े हो सकें, किसी दूसरे के ऊपर निर्भर न रहें।
प्रशिक्षण प्राप्त कर युवक जहाँ रोजगार में लगेंगे, वहीं उत्तर प्रदेश की विकास दर भी बढ़ेगी। इस योजनान्तर्गत सभी वर्गों के पात्र युवक-युवतियों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अन्तर्गत 14 वर्ष से 35 वर्ष तक के युवक-युवतियाँ आॅनलाइन प्रशिक्षण के लिए निःशुल्क पंजीकरण करा सकते हैं। कौशल विकास मिशन के अन्तर्गत आॅनलाइन पंजीकरण कराने के लिए आवेदनकर्ता के पास आधार कार्ड होना जरुरी है। साथ ही निवास प्रमाण पत्र, शैक्षिक प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र, निर्माण श्रमिक पंजीकरण संख्या, बैंक खाता विवरण, बी0पी0एल0 कार्ड/आय प्रमाण पत्र भी आवेदन पत्र के साथ संलग्न करना जरुरी है। पंजीकरण कराने वाले अभ्यर्थी अपने जनपद के निर्धारित निजी/सरकारी संस्थानों में प्रशिक्षण ले सकते हैं।
इस योजना के अन्तर्गत दिये गये 34 विषयों/क्षेत्रों के 283 पाठ्यक्रमों में किसी भी पाठ्यक्रम में अपना चयन कर सकते हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को मूल पाठ्यक्रम के साथ ही सभी अभ्यर्थियों को अंग्रेजी बोलने एवं कम्प्यूटर की सामान्य जानकारी भी दी जाती है।
यह प्रशिक्षण उच्च स्तरीय निजी प्रशिक्षण संस्थानों और सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा दिये जाते हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरान्त समस्त प्रशिक्षणार्थियों का मूल्यांकन योग्य एसेसर एजेंसी के द्वारा किये जाने की व्यवस्था सरकार ने की है। मूल्यांकन में सफल होने वाले प्रशिक्षणार्थियों को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों से सफल लाभार्थियों का प्रमाण पत्र दिया जाता है। यह प्रमाण पत्र स्वरोजगार करने या अन्य उद्यमों में नौकरी करने हेतु सहायता देता है। प्रशिक्षण एवं प्रशिक्षण के दौरान समस्त कार्यक्रमों का व्यय सरकार द्वारा वहन किया जाता है।
कौशल विकास मिशन के अन्तर्गत, एग्रीकल्चर, आॅटोमोटीव, बैंकिंग एवं एकाउन्टिंग ब्यूटीकल्चर एवं हेयर ड्रेसर, बिजनेस एवं कामर्स, कार्पेट, कुरियर एवं लाजिस्टिक्स कन्स्ट्रक्शन, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रानिक्स, फैब्रीकेशन, फैशन डिजायनिंग, फूड प्रोसेसिंग एवं प्रिजर्वेशन, गारमेंट मेकिंग, हास्पिटैलिटी, इन्फारमेशन एवं कम्युनिकेशन टेक्नोलाॅजी, इन्श्योरेंस, लेदर एवं स्पोर्ट्स गुड्स, मटीरियल मैनेजमेंट, हेल्थकेयर, पेंट, प्लास्टिक प्रोसेसिंग, प्रिंटिंग, प्रोसेस इंस्टूमेंटेशन आदि विषयों के क्षेत्र में विभिन्न ट्रेड्स/पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण लेते हुए अभ्यर्थी अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। प्रदेश में लाखों युवक-युवतियाँ प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने रोजगार/स्वरोजगार से लग रहे हैं। प्रदेश में कौशल विकास मिशन से प्रशिक्षण प्राप्त कर लाखों नवयुवक मुद्रा लोन योजनान्तर्गत ऋण लेकर अपना व्यवसाय/उद्यम करते हुए आत्मनिर्भर हो रहे हैं।


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