शरद पवार ने सोनिया गांधी से की मुलाकात, मगर महाराष्ट्र में सस्पेंस बरकरार

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर अब भी सस्पेंस बरकरार है। एनसीपी के प्रमुख शरद पवार सोमवार को जब कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने 10 जनपथ पहुंचे तो लगा कि आज शायद महाराष्ट्र का गतिरोध खत्म हो जाए । लेकिन सोनिया गांधी से मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में शरद पवार ने यह कहकर शिवसेना की इन उम्मीदों पर एक तरह से पानी ही फेर दिया कि अब तो सरकार बन ही जाएगी।

शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत लगातार सरकार गठित किए जाने का दावा कर रहे हैं । वो बोले चुके हैं, ‘हम सदन में 170 विधायकों के आंकड़े के साथ बहुमत सिद्ध करेंगे । शरद पवार अनुभवी हैं, वो सरकार चाहते हैं । इसलिए उनका अनुभव काम आएगा । शरद पवार को लेकर हमारे मन को कोई संशय नहीं हैं । एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर हम अगले पांच साल तक सरकार चलाएंगे ।

सोनिया गांधी से मीटिंग के बाद शरद पवार ने कहा कि कांग्रेस और एनसीपी के नेता हालात का जायजा लेने के अलावा दोनों पार्टियों के नेताओं से बातचीत करेंगे। अब तक सरकार गठन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई ।हमने अन्य मुद्दों पर बातचीत नहीं की। हम स्थिति पर नजर बनाए रखेंगे । सभी नेताओं की राय लेने के बाद ही आगे का रास्ता तय करेंगे ।

शरद पवार ने यह भी कहा कि स्वाभिमानी शेतकरी संगठन भी हमारे साथ है । उनके विधायक जीते हैं । हम उन्हें भी दरकिनार नहीं कर सकते. पवार ने कहा, हम सभी दलों को भरोसे में लेंगे ।

सियासत के चतुर खिलाड़ी माने जाने वाले शरद पवार सरकार गठन को लेकर उत्साहित शिवसेना को अपनी ‘गुगली’ से चित करेंगे क्या? एनसीपी, कांग्रेस के साथ सरकार गठन के सपने देख रही शिवसेना की चिंताएं शरद पवार की सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद और बढ़ गईं होंगी । शिवसेना की यह चिंता दिल्ली में देर शाम शरद पवार से मुलाकात के बात संजय राउत की बातों में साफ नजर आई ।

शरद पवार से मुलाकात के बाद संजय राउत ने कहा कि सरकार गठन की जिम्मेदारी सिर्फ हमारी नहीं है। जिनकी जिम्मेदारी है वो (बीजेपी) पहले ही उससे दूर भाग गए । लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि हम जल्द ही सरकार बना ले लेंगे । दिलचस्प बात यह है कि एनसीपी और कांग्रेस, शिवसेना से सरकार को लेकर बात कर रही हैं लेकिन सोनिया से मुलाकात से पहले ही शरद पवार ने कह दिया था कि भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और अब उन्हें अपने रास्ते चुनने होंगे ।

बहरहाल, इन सब सियासी घटनाक्रमों के बीच शरद पवार और कांग्रेस के रुख से सियासी गेम थोड़ा पेचिदा हो चला है । अब यह समझना थोड़ा मुश्किल हो गया है कि आखिर शरद पवार के दिल में चल क्या रहा है ।


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