असत्य पर सत्य की जीत, धूं-धूं जला रावण का पुतला

रिविन शुक्ला (संवाददाता)

बिलसंडा (पीलीभीत) । कस्बा में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मेला कमेटी के आयोजक रमेश चंद्र गुप्ता एडवोकेट की अध्यक्षता में एक ऐतिहासिक श्रीरामलीला का आयोजन किया गया । मेला अध्यक्ष ने बताया है कि मेला श्री रामलीला मंचन का आयोजन 30 अक्टूबर से शुरू किया गया था और आज इसका समापन किया गया। इस दौरान मेले में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ती दिखाई दी है। रामलीला मैदान में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहे ।
प्रभु श्रीराम के हाथों रावण के पुतले में आग लगते ही पूरा मेला मैदान भगवान जय श्रीराम के जय कारों से गूंज उठा । इसके बाद मेला मैदान में आतशबाजी का अद्भुत नजारा देखने को मिला । जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

मेला मंच पर वृंदावन के कलाकारों ने मंचन के दौरान दिखाया कि रावण के पुत्र मेघनाथ और विशालकाय रूप धारण किये भाई कुंभकरण के वध के पश्चात दशानन अपने क्रोध को नहीं रोक सका । तब लंकाधिपति अपनी पूरी लंका की सेना को युद्घ के लिए तैयार कर राम दल को युद्ध के लिए ललकारता है।
जैसे ही रावण राम दल से युद्घ के लिए कूच करता है,
इसी दौरान दशानन की भर्या मंदोदरी अपने स्वामी के चरणों को पकड़कर बहुत समझने का प्रयास करती है और कहती है कि भगवान राम से युद्घ न करें इसी में भलाई है । परन्तु अहंकार में चूर लंकाधिपति रावण पर पत्नी के किसी कथन का कोई असर नहीं होता है।
तब रावण अपनी भर्या की प्रार्थना के साथ ही सभी अनुरोधों को अनसुना कर अपनी राक्षस सेना को आदेशित करते हुए भगवान श्री राम से युद्घ के लिए रणभूमि में जा पहुंचता है। राम भगवान और अहंकारी रावण का भयंकर युद्ध होता है । रावण भी अपनी माया जाल बिछाकर युद्ध करता है। जब श्रीराम रावण के सभी सिर अपने वाणों से अलग कर देते हैं, कि रावण पुनः सर धारण कर लेता है।वही विभीषन इसी दौरान प्रभु श्री राम से कहते हैं कि दशानन की नाभि में अमृत है । इसी कारण दशानन पुनः सर धारण करता है । तब भगवान श्री राम धनुष पर अग्नि बाण का अनुसन्धान कर छोड़ते हैं जो सीधे रावण की नाभि में जा लगता है । नाभि में बाण लगते ही रावण धराशायी हो जाता है। इसी दौरान जब रावण प्राण त्यागने लगता है तब भगवान श्रीराम के अनुज भ्राता लखन को रावण से शिक्षा लेने के लिए आदेशित करते हैं।
मरते समय रावण के मुख से निकलता है श्रीराम । औऱ इसी के साथ अपने प्राण त्याग देता है। उधर मेला मैदान में रावण के पुतले में आग लगा दी जाती है, जो धूं- धूं कर जलने लगता है। पूरे मेला मैदान के दर्शकों में भगवान राम के जय- जयकारों से गूंज उठता है।

थाना प्रभारी निरीक्षक हरिशंकर वर्मा मेला ग्राउन्ड में पुलिस फोर्स के साथ मुस्तैद बने रहे। मेले में विधायक रामसरन वर्मा, उनके बेटे विवेक वर्मा, उपजिलाधिकारी सौरभ दुबे, पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रवीण मलिक, तहसीलदार विजय कुमार त्रिवेदी, मेला आयोजक, रमेश चन्द्र गुप्ता एडवोकेट, अध्यक्ष उमेश गुप्ता, रवि शुक्ला प्रबन्धक, कोषाध्यक्ष रिविन शुक्ला ब्रजपाल कश्यप, दीनदयाल, सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे ।

दशानन वध से पहले मेला मैदान में पधारे अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से शांति का संदेश देते हुए आकाश में अग्नि के गुब्बारे छोड़े गए। मेला में अनेकों प्रकार की दुकानों के साथ ही झूले भी लगे हुए थे ।दूर दराज के लोगों ने भी राम लीला मंचन का आनन्द लिया।
वही मेला में पुलिस बल पूरी तरह अपनी व्यवस्था में लगा रहा। कस्बा के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की भारी संख्या में भीड़ दिखाई दे रही थी।


अपने शहर के एप को डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे |  हमें फेसबुक,  ट्विटर,  और यूट्यूब पर फॉलो करें|
loading...
error: Content is protected !!